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क्षमा मांगना ओर करना दुनिया का सबसे बड़ा धर्म

7 वर्ष पहले
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राष्ट्रसंत ललितप्रभ सागर जी महाराज ने कहा कि क्षमा मांगना और क्षमा करना ये दुनिया के दो सबसे बड़े धर्म है। जो गलती होने पर क्षमा मांग लेता है ओर गलती हो जाने पर क्षमा कर देता है वहीं सही मायने में धार्मिक कहलाता है।

वे गुरुवार को नगर में भव्य मंगलप्रवेश के पश्चात लॉयन्स क्लब के तत्वाधान में यहां कृषि उपज मण्डी प्रांगण में दो दिवसीय दिव्य सत्संग माला को सं‍बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गलती करके सुधर जाए उसे इंसान कहते है, जो गलती पर गलती करे उसे नादान कहते है और जो उससे ज्यादा गलतियां करे उसे शैतान कहते है। गुस्सा और अहंकार जीवन को नरक बना देते हैं ै। आपका पल भर का गुस्सा आपके भविष्य को चौपट कर सकता है। 2 मिनट का गुस्सा 20 साल के संबंधों पर पानी फेरने में क्षण नहीं लगाता। चार दिन की जिंदगानी है जब प्यार करने के लिए पूरा वक्त नहीं मिलता तो हम गुस्सा करके क्यों इसे और छोटा करे। सत्संग के दौरान कृषि मंडी प्रांगण में काफी तादाद में शहरवासी उपस्थित थे।

अतिथियोंने किया दीप प्रज्वलन : दिव्यसत्संग माला का शुभारंभ पालिकाध्यक्ष धर्मीचंद खटौड़, जैन समाज अध्यक्ष सोहनलाल तातेड़, मंत्री ज्ञानसिंह सांखला, मूर्तिपूजक संघ मंत्री टीकमचंद गोखरू, दिगंबर समाज अध्यक्ष सुभाष कासलीवाल, माहेश्वरी समाज अध्यक्ष मदनगोपाल बाल्दी, अग्रसेन मण्डल अध्यक्ष अशोक गोयल, तहसीलदार गोपाल परिहार, थाना अधिकारी अमराराम विश्नोई सहित अन्य ने द्वीप प्रज्वलित कर किया।

अगुवाईकर किया अभिनंदन : संतललितप्रभ सागर, चंद्रप्रभ सागर मुनि शांतिप्रिय जी के बिजयनगर आगमन पर लॉयन्स क्लब सदस्यों एवं सकल जैन समाज अन्य द्वारा अगुवाई कर अभिनंदन किया गया। बाद में शहर के मुख्य बाजार से शोभायात्रा के साथ उन्हें कृषि मण्डी लाया गया। इस दौरान लॉयन्स क्लब अध्यक्ष पुखराज तातेड़, शांतिकुमार चपलोत, ज्ञानचंद कोठारी, राधेगोपाल खंडेलवाल, महावीर कच्चारा, मनोहर कोगटा, राजेन्द्र पामेचा, मुकेश संचेती सहित काफी तादाद में शहर के लोग मौजूद थे।

बिजयनगर। राष्ट्रसंत ललितप्रभ चंद्रप्रभ सागर का शहर मंे मंगलप्रवेश।