वरघोड़ा आडंबर नहीं, शासन शोभा है
जैनशासन की व्यवस्था अत्यंत निराली है। यहां पर तपस्वी को तो महज आत्मा के कल्याण के लिए तप करना होता है परन्तु तप धर्म की महिमा को समझे इस निमित्त स्वजन एवं संघ द्वारा उनका वरघोड़ा निकाला जाता है। जैन आचार्य यशोर|सूरि मसा रविवार को तपस्विनी बहन स्नेहलता गेलड़ा के 30 उपवास के मासक्षमण महा तप की अनुमोदना में निकाले गए वरघोड़े के पश्चात संभवनाथ जैन मंदिर में तप अनुमोदनार्थ आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। आचार्य प्रवर ने कहा कि शादी-विवाह अथवा अन्य समारोह एवं सांसारिक कार्य आडंबर से करते और धर्म की अनुमोदना इसे निषेध करना यहां कहा तक उचित है।आचार्य प्रवर ने कहा जिनशासन के गौरवशाली इतिहास पर दृष्टि डाली जाए तो तप के वरघोड़े से ही अकबर बादशाह को जैन धर्म के प्रति जिज्ञासा जागृत हुई पूज्य हीर सूरि मसा आदि की प्रेरणा का नतीजा यह रहा कि 6-6 माह तक पूरे साम्राज्य में अमारिका पालन हुआ। आचार्य प्रवर ने कहा कि वरघोड़ा गौरवशाली जिनशासन की प्रभावना है। इससे तप एवं परमात्मा के प्रति जीवों की श्रद्धा एवं बहुमान उत्पन्न होता है। धर्मसभा के दौरान तप अनुमोदनार्थ कई श्रद्धालुओं ने टीवी का त्याग करने के प्रत्याख्यान लिए। धर्मसभा के दौरान तपस्विनी स्नेहलता गेलड़ा को संघ की ओर से बहुमान किया गया। इससे पूर्व आचार्य पुण्यर|सूरि मसा एवं यशोर|सूरि मसा सहित संत-साध्वी जन तपस्विनी गेलड़ा के बजरंग कॉलोनी स्थिति आवास पर पदार्पण हुआ। यहां मासक्षमण तप की महिमा बताते हुए आचार्य प्रवर ने कहा मासक्षमण यानि मृत्यु पर जय प्राप्त करने का अभ्यास है। तत्पश्चात आचार्य प्रवर के सान्निध्य में वरघोड़ा यहां से प्रारंभ हुआ जो सथाना बाजार, चारबत्ती चौराहा, महावीर बाजार, बापू बाजार, शिव मंदिर, कृषि मंडी चौराहा से पीपली चौराहा होते हुए महावीर बाजार स्थित संभवनाथ जैन मंदिर पहुंचा। वरघोड़े में श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ अध्यक्ष भंवरलाल मांडोत, मंत्री टीकमचंद गोखरू, पारसमल गेलड़ा, संतराज बाबेल, पुखराज मांडोत, विनोद दुग्गड़, पवन गेलड़ा, लालचंद कांठेड़ आदि लोग उपस्थित थे।
बिजयनगर. मासक्षमणतप करने वाली स्नेहलता गेलड़ा परिजनों के साथ।
बिजयनगर. वरघोड़ेमें उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब।