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\" ऐसी वाणी बोलिए, मन का अापा खोय\'

7 वर्ष पहले
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संतचंद्रप्रभ सागर महाराज ने कहा कि इंसान की पहचान ऊंचे पहनावे से नहीं मीठी जुबान से होती है। हम शब्दों को संभाल कर बोले, शब्दों में बड़ी जान होती है। जुबान से निकला एक शब्द किसी के लिए औषधि और किसी के लिए घाव साबित हो सकता है। वह शुक्रवार रात कृषि उपज मंडी प्रांगण में लॉयंस क्लब के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय दिव्य सत्संग माला के अंतिम दौर के प्रवचनों में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि शब्दों से ही आरती, अरदास और अजान होती है। ये समंदर के वे मोती है जिनमें अच्छे आदमी की पहचान होती है। बोलने की कला राम से सीखो जहां रावण ने कड़क जुबान से अपने सगे भाई विभीषण काे खो दिया वहीं राम ने मधुर वाणी से दुश्मन के भाई को भी अपना बना लिया। उन्होंने कहा कि बोलने की कला में ही लोकप्रियता का राज छिपा हुआ है। हमारे कॅरियर में चेहरे की खूबसूरती की भूमिका महज दस प्रतिशत होती है, पर वाणी की खूबसूरती की भूमिका नब्बे प्रतिशत होती है।

पुस्तकका किया विमोचन: चंद्रप्रभसागर महाराज. की जीवन की पावरफुल बातें की पुस्तक का विमोचन किया गया। पुस्तक का विमोचन लादूलाल, ज्ञानचंद, पुखराज, दिलीप राकेश मुकेश तातेड़ एवं प्रेमबाई तातेड़ ने किया। इस मौके पर तहसीलदार गोपाल परिहार भी मौजूद रहे।

साहित्यसे किया संतों का अभिनंदन: दिव्यप्रवचन माला के समापन के अवसर पर संत ललितप्रभ, चंद्रप्रभ सागर शांति मुनि का लॉयन्स क्लब के शांति कुमार चपलोत, ज्ञानचंद कोठारी, राधेगोपाल खंडेलवाल, अमित उपाध्याय, राजकुमार लूणावत, निहालचंद भटेवड़ा, महावीर कच्चारा, मनोहर कोगटा, राजेन्द्र पामेचा, मुकेश संचेती सहित अन्य ने साहित्य भेंट कर अभिनंदन किया।