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तेज बारिश में बही दाे साल पहले बनी पुलिया की मिट्टी, आवागमन बंद

4 वर्ष पहले
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^यह बात सही है कि पुलिया पुरानी है और ग्राम पंचायत ने बनवाई थी मगर दो साल पहले ही मौके पर पीडब्ल्यूडी ने पुलिया और सीसी सड़क का काम करवाया था। उस दौरान तकनीकी अधिकारियों ने उसकी सुरक्षा को लेकर जांच-पड़ताल तो की होगी। संगीतानायक, सरपंच ग्राम पंचायत मेडिय़ा

^वर्ष2015 में ही सड़क और पुलिया का काम पीडब्ल्यूडी ने ठेकेदार के जरिये पूरा करवाया था। एक बारिश बाद दूसरे मानूसन की पहली बारिश में ही पुलिया का एक हिस्सा बह गया। यह तो गनीमत रही कि कोई भारी वाहन इधर से नहीं गुजरा नहीं तो हादसा हो सकता था। कमलकिशोरवैष्णव, ग्रामीण

^पीडब्ल्यूडीने मौके पर सीसी जरूर बनवाई थी, मौके पर पुलिया का जो हिस्सा बहा है उसके लिए ग्राम पंचायत जिम्मेदार है, कि पीडब्ल्यूडी। विभाग ठेकेदार को सड़क या पुलिया दुरुस्त करने के लिए पाबंद नहीं करेगा। वैसे मौके पर एईएन को भेजा था वही पूरी जानकारी देंगे। ओमप्रकाशचौहान, एक्सईएन पीडब्लयूडी

एईएन एसएस सलूजा से बातचीत...

आपनेमौका-निरीक्षण किया तो इसके लिए किसे जिम्मेदार मानते हैं

प्रकृति को।

सड़क और पुलिया की लंबाई क्या है और कितनी राशि खर्च हुई थी

अब दो साल पहले सड़क बनी थी, इतना कोई याद तो रहता नहीं है। हालांकि इसे पुलिया नहीं कहेंगे बरसाती नदी के लिए सड़क के नीचे पाइप डाले गए थे वह भी जहां से मिट्टी हटी उससे आगे डाले गए थे।

यानि जो सड़क और पुलिया आपने ठेकेदार के माध्यम से बनवाई वह सही है। उसमें कोई खामी नहीं है

बिल्कुल...। इसका पीडब्ल्यूडी से कोई लेना-देना नहीं। एक रात पहले पुलिया के ऊपर से भी पानी बह रहा था। पुलिया का निर्माण पंचायत ने बरसों पहले करवाया था, रपट की मिट्टी ढीली थी वह हिस्सा बह गया।

अब आगे क्या होगा, आप कोई कार्रवाई करेंगे

यदि ग्राम पंचायत खुद के खर्च से इसे दुरुस्त करवाना चाहेगी तो नियमानुसार हम ठीक करने को तैयार हैं।

विभाग ने ध्यान नहीं दिया कि नीचे का हिस्सा कितना मजबूत है

हमें तो सीसी बनानी थी, इससे पहले डब्ल्यूबीएम पंचायत ने ही कराई थी। ऐसे में हम कैसे कह सकते हैं कि वह कितनी मजबूत होगी।

एक नजर ठेकेदार को दिए टेंडर और वर्क ऑर्डर पर

{किसने मांगे थे टेंडर - सार्वजनिक निर्माण विभाग

{ कब मांगे - 21 जनवरी से 24 फरवरी 2014 तक ऑनलाइन टेडर मांगे

{ टेंडर प्रक्रिया - 26 फरवरी 2014 को हुई पूरी

{ किसे जारी हुआ टेंडर - बिजयनगर की फर्म गिरिराज कंस्ट्रक्शन को कम दर पेश करने पर

{ कितनी थी राशि - 2 करोड़ 92 लाख 52 हजार

{ कितने थे काम - (8 काम)

{ मकरेड़ा से रामपुरा मेवातियान - 2.10 किमी, 56.48 लाख रुपए

{ ठेकेदार को इसके अलावा अरनाली-पालड़ी रोड, ब्यावर-बिजयनगर रोड से कालियावास, संपर्क सड़क गोगेला, संपर्क सड़क लालावास, संपर्क सड़क देवगढ़ मसूदा खरवा रोड से बचेवड़ी और बांदनवाड़ा से बरजाल तक की सड़क निर्माण का वर्क ऑर्डर भी जारी हुआ था।

ब्यावर. मकरेडा नदी पर बनी पुलिया जो पानी के बहाव से नीचे की मिट्टी खिसकने से अधरझूल में लटकी है। फोटो|नवीन गर्ग

राजेश कुमार शर्मा| ब्यावर

ग्रामपंचायत मेडिय़ा में महज दो साल पहले पीडब्लयूडी की ओर से बनवाई गई सड़क और पुलिया के नीचे की मिट्टी ब्यावर क्षेत्र में दो दिन पहले हुई तेज बारिश में बह गई। सुबह जब आस-पास के खेतों में काश्तकार पहुंचे तो उन्होंने सुरक्षा के चलते तत्काल सड़क पर आवागमन बंद किया। इधर सड़क और पुलिया बनवाने वाली एजेंसी पीडब्ल्यूडी और ग्राम पंचायत मेड़िया ने इस लापरवाही के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार बताया। भास्कर ने अधिकारियों से इसकी तकनीकी खामी जाननी चाही तो वे बोले प्रकृति है जिम्मेदार।

ग्राम पंचायत मेड़िया में ग्राम मकरेड़ा से रामपुरा मेवातियान तक 2.10 किमी सड़क बनी है। इसमें मकरेड़ा नदी के ऊपर करीब 100 मीटर तक पुलिया बनी है। जिसमें बरसाती पानी को निकालने के लिए बड़े पाइप लगे हैं। गुरुवार को हुई तेज बारिश के बाद जब शुक्रवार सुबह चीता का बाडिय़ा निवासी लालसिंह पास में ही स्थित अपने खेत पर पहुंचा तो उसे सड़क के नीचे की मिट्टी गायब दिखी। साथ ही जहां पाइप बिछाए गए थे उसके समीप का हिस्सा अधर में झूलता दिखाई दिया। उसने तत्काल वार्डपंच जयबाला को सूचित किया। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधर में लटकती सड़क और पुलिया पर तत्काल आवागमन बंद किया। क्योंकि इस रास्ते पर रोजाना आस-पास के गांवों से रीको और शहरी क्षेत्र में करीब 4 हजार लोगों का आवागमन रहता है।

इनगांवों का है संपर्क : मकरेड़ारोड पर बनी यह पुलिया आगे जाकर सिक्सलेन हाइवे से जुड़ती है। जो मकरेड़ा, मेड़िया, ब्यावर खास, गोपालपुरा, छीपा कॉलोनी, चीता का बाड़िया, भोमियाजी का थान, मेडिय़ा को जोड़ती है।

एकहजार एमएम के पाइप लगे हैं पुलिया में :

ठेकेदारको जो टेंडर जारी हुआ उसमें 2.10 किमी लंबी सड़क बनाने के दौरान मकरेड़ा नदी पर पुलिया भी बनानी थी। इसके लिए टेंडर की शर्तों में ठेकेदार को 1000 एमएम के पाइप डालने थे। पुलिया निर्माण में गुणवत्ता युक्त निर्माण सामग्री का उपयोग भी करना था। मगर दूसरी बारिश में ही पुलिया ढहने के कगार पर गई। इसके लिए विभाग ने ठेकेदार को 56.48 लाख की प्रशासनिक स्वीकृति और 49.99 लाख का वर्क आर्डर जारी किया था।



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