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इकत्तीस हजार खर्च करके सुमन बनीं जिला प्रमुख

6 वर्ष पहले
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जिलापरिषद सदस्य का चुनाव लड़ने से प्रमुख बनने तक सुमन रायला ने करीब 31 हजार रुपए खर्च किए। सदस्य के चुनाव लड़े चार प्रत्याशियों ने तो धेला भी खर्च नहीं किया। जिला परिषद सदस्य के लिए अधिकतम खर्च की सीमा 80 हजार रुपए है।

पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव लड़े प्रत्याशियों ने निर्वाचन आयोग में प्रचार-प्रसार पर हुए खर्च का ब्यौरा पेश किया है। मंगलवार तक 69 प्रत्याशियों ने खर्चे विवरण जमा करा दिया था। इनमें वार्ड 35 से जीतकर जिला प्रमुख बनीं सुमन रायला ने कुल 30800 रुपए खर्च बताया है। परिषद सदस्यों में वार्ड 25 की सोनू देवी ने सबसे ज्यादा 49 हजार 575 रुपए खर्च किए हैं। वहीं वार्ड छह से दिलीप मीणा, 19 से मुनेष, 24 से सुनीता और वार्ड नंबर 34 से वीणा पूनियां ने चुनाव के दौरान कोई खर्चा नहीं किया।

विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने के बाद परिषद सदस्य बने प्यारेलाल ढूकिया ने दस हजार 500 रुपए खर्च किए। लोकसभा चुनाव के लिए भी भाग्य आजमा चुके बनवारीलाल सैनी ने 14100 रुपए भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष दशरथसिंह शेखावत ने महज तीन हजार रुपए खर्च होने का विवरण दिया है।

(चुनावसे जुड़े समाचार पेज 18 पर भी)

प्रत्याशी खर्च

बजरंगसिंह चारावास 240843

पूजा बाबल 210788

इंद्रमणि आबूसरिया 5700

दिनेश सूंडा 19 हजार

सांवरमल धानिया 14178

सोमवीर लांबा 22700

(राशिरुपए में)

तीन दिन में चुनाव खर्च का ब्यौरा नहीं तो कार्रवाई

बुहाना .सरपंच का चुनाव लड़ने वाले जनप्रतिनिधियों की दिलचस्पी चुनाव के दौरान हुए खर्च का ब्यौरा पेश करने में नहीं है। खर्च का ब्यौरा परिणाम के तीन दिन में पेश करना था। क्षेत्र में इसकी अंतिम तिथि 27 जनवरी के 14 दिन बीत जाने के बाद भी अधिकांश ने ब्यौरा प्रस्तुत नहीं किया। मंगलवार को एसडीएम सोहनराम चौधरी ने आदेश जारी किया कि शुक्रवार तक खर्च का ब्यौरा नहीं देने वाले प्रत्याशियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। चुनाव लड़ने पर अयोग्य भी ठहराया जा सकता है। पंचायत समिति की 43 पंचायतों में 246 ने सरपंच 96 ने पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ा था। इनमें से 95 ने ही खर्च का ब्यौरा प्रस्तुत किया है।