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विषयों में आसक्ति कम करो

7 वर्ष पहले
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चौगानजैन मंदिर में गुरुवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि विमुतसागर महाराज ने कहा कि जो इंद्रिय को जीते है उसे जिनेंद्र कहते है। जिनेंद्र देव इंद्रियों के विषयों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते है, वे स्वयं विषयों पर हावी होते है। उन्होंने कहा कि विषयों में अनुरक्त जीव को मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती है क्योंकि वह विषयों का दास रहता है। स्पर्श इंद्रिय का दास होकर हाथी गढ़े में गिरकर बंधन को प्राप्त होता है। रसना के विषय की दास मछली, कांटे में फंस कर मृत्यु को प्राप्त होती है, जबकि भौरा सुगंध के लोभी होकर रात्रि को कमल की पंखुडिय़ों में बंद हो जाता है और हिरन, कर्ण, इंद्रिय के विषय संगीत को सुनकर शिकार बन जाता है। एक-एक इंद्रिय में आसक्त होने से प्राण त्यागने की नौबत जाती है, तो पांचों इंद्रियों में आसक्त मनुष्य कैसे सुखी रह सकता है। जीवन में सुगम चाहते हो तो विषयों में आसक्ति को कम करो। प्रवक्ता गुंजन बाकलीवाल ने बताया कि महाराज के प्रवचनों से पूर्व मंगलाचरण सुरेश सोनी ने किया। भगवान महावीर स्वामी की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्जवलित समाज अध्यक्ष विनोद पाटनी, नरेंद्र बाकलीवाल नरेंद्र सोनी ने किया। प्रतिदिन प्रवचन सुबह 8.30 से 9.15 बजे तक चौगान जैन मंदिर आश्रम में होंगे।

विश्रांतसागर ने दिए प्रवचन

नैनवां.शहर के दिगंबर जैन मंदिर में नियमित दिगंबर जैन मुनि विश्रांत सागर महाराज के प्रवचन हो रहे है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर धर्मलाभ ले रहे है। मुनि विश्रांत सागर ने बताया कि मनुष्य द्वारा किए गए अच्छे कार्य, धर्म के कार्य उसके मरने के बाद भी याद रहेंगे।

कथामें सुनाए रुक्मणी विवाह के प्रसंग: लाखेरी. कलशयात्राके साथ सालमदरा मंदिर पर गुरुवार को कथा वाचक पं. सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन का कुछ समय प्रतिदिन भगवान के स्मरण में लगाना चाहिए। भागवत कथा में रुक्मणी विवाह के प्रसंग का वर्णन लिया। कथा में राजकुमार वर्मा, ओमप्रकाश वर्मा, कन्हैयालाल पारेता, बिरधीलाल सैनी, चेतन पारेता, शंभू शर्मा, कृष्णा शर्मा आदि मौजूद थे।

बूंदी। चौगान जैन मंदिर में प्रवचन के दौरान उपस्थित श्रद्धालु।