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भूतकाल बनने से पूर्व ही वर्तमान को संभाल लो
बूंदी. जैनमुनि विमुतसागर महाराज ने चौगान जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह जीव अर्थात हम सब अनादि काल से परिभ्रमण करते हुए संसार में दुख भोग रहे हैं। अभी पंचम काल चल रहा है, जो महा दुखदायी है। अरिहंत भक्ति, साधु भक्ति के माध्यम से अशुभ कर्मों का नाश कर स्वर्ग का सुख प्राप्त किया जा सकता है और परंपरा से, संसार के दुखों से हमेशा के लिए मुक्ति हो सकती है।
महाराज ने कहा कि भूतकाल बनने से पूर्व ही वर्तमान को संभाल लो नहीं तो भविष्य में पछतावा होगा। मनुष्य गति मिली है पंच परमेष्ठी की भक्ति कर इसका सदुपयोग कर लो। प्रवक्ता गुंजन बाकलीवाल ने बताया कि महाराजश्री के प्रवचन से पहले मंगलाचरण शकुंतला बडज़ात्या ने किया। भगवान महावीर की तस्वीर के समक्ष द्वीप प्रज्वलन मनोज कासलीवाल तथा संचालन नवीन गंगवाल ने किया।
मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु मोह: मुनिश्री: नैनवां. दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में प्रवचन देते हुए दिगंबर जैन मुनि विश्रांत सागर महाराज ने बताया कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु मोह है। इसके कारण जीव संसार में भटक रहा है। मनुष्य को राग, द्वेष, मोह ऐसे जकड़े हुए है कि वह इससे निकल नहीं पा रहा है और धर्म को भूलकर धन कमाने के पीछे भाग रहा है। इस जीव की रक्षा धन से नहीं धर्म से होगी। मनुष्य के पास दो हाथ है इनसे भगवान की माला, आरती, अभिषेक कर सकता है। दो पैर है उनसे दूर जाकर तीर्थ वंदना कर सकता है। मनुष्य जीते जी मोह का त्याग कर दे तो वह त्याग कहलाएगा।
नैनवां। प्रवचन देते मुनि विश्रांतसागर महाराज।
बूंदी। जैन मुनि विमुतसागर महाराज की शुक्रवार सुबह एक आवास पर आहारचर्या हुई।