गुरु की कृपा से बदलता है जीव: बाबा
बाईपासरोड स्थित गुरुद्वारा श्रीलंगर साहिब में चल रहे रुहानी गुरमत समागम के तहत दूसरे दिन दीवान सजाया गया। इस मौके कथा कीर्त्तन करते हुए रतवाड़ा साहिब चंडीगढ़ से आए बाबा लखबीरसिंह ने समर्थ गुरु का महत्व समझाते हुए कहा कि कच्चा गुरु, अंधा गुरु विद्वान गुरु किसी मनुष्य पर कृपा कर उसकी सूरत को नहीं जगा सकते। समर्थ गुरु ही हैं जिनकी कृपा हो जाए तो मनुष्य का जीवन बदल जाता है। वह उनका हर सांस में सिमरन करने लगता है तथा उसे घट-घट में परमात्मा नजर आने लगता है। जो लोग परमात्मा का नाम नहीं जपते वे आत्मक मौत मरे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि मौत पांच तरह की होती है। पहली आर्थिक मौत जो गरीबी के कारण होती है। भाईचारा मौत वह है जब भाईचारे का संबंध टूट जाते हैं। राजनीतिक मौत में हाथ से राज चला जाता है। शारीरिक मौत में शरीर से चैतन्य आत्मा चली जाती है तथा आत्मक मौत उनकी होती है जो प्रभु का नाम सिमरन नहीं करते। उन्होंने कहा कि जिस पर प्रभु की कृपा हो जाती है वह आत्मिक मौत नहीं मरता। मनुष्य को जब तक सांसारिक सहारे नजर आते हैं तब तक वह प्रभु के आगे अरदास नहीं करता और जब सभी आसरे खत्म हो जाते हैं तो उसे परमात्मा की याद आती है। मुख्य ग्रंथी कृपालसिंह छाबड़ा ने बताया कि शनिवार को भी दीवान सजाया जाएगा तथा गुरु का अटूट लंगर वरतेगा।