कर्मों को सुधारो, दुख से मिलेगा छुटकारा
बूंदी. प्रजापिताब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय ने सात अरब सत्कर्म महायोजना के तहत विकासनगर बालिका सीनियर सेकंडरी स्कूल में
कार्यक्रम किया।
ब्रह्माकुमारी भारती दीदी ने कहा कि मानव जीवन में पल-पल दुख सुख का अनुभव करता है। दुख और सुख धर्मजन्य है। जब तक मानव कर्मों को सुधारे तब तक दुख से छुटकारा और सुख की प्राप्ति हो नहीं सकती है। कई लोगों की मान्यता है कि दुख सुख परमात्मा ही देते है। परमात्मा को दुखहर्ता सुखकर्ता कहा जाता है। परमात्मा सुखदाता अवश्य है, लेकिन कर्म के सिद्धांतों के अनुसार ही सुख देते है। इससे पहले प्रधानाचार्य तेजकंवर ने भारती दीदी का स्वागत किया। कार्यक्रम में बालिकाओं से सत्कर्म करने के लिए संकल्प पत्र भी भरवाएं।
विचारशून्य हो जाता है क्रोधी मनुष्य: मुनिश्री: नैनवां.कस्बेके बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा में मुनि विश्रांत सागर महाराज ने बताया कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु क्रोध है। क्रोध वह अग्नि है, जो स्वयं को जलाती है।
क्रोध करने वाले मनुष्य को स्वयं को हानि पहुंचा है। क्रोध करने वाला मनुष्य, बिना विवेक शून्य होकर करने वाले काम करता है। क्रोध में गुरुजनों का अनादर कर देता है। क्रोध जहर है जो स्वयं नष्ट कर देता है। क्रोधी मनुष्य विचार शून्य हो जाता है। क्रोध के कारण अपने भी शत्रु बन जाते है। क्रोध में आकर मनुष्य अपशब्दों का प्रयाेग करता है। क्रोध जब शांत होता है तब विवेक जाग्रत होता है। धर्मसभा में मंगलाचरण महावीर सरावगी ने किया।
किसीवस्तु से आसक्ति तोड़ना ही त्याग: कमल मुनि
बूंदी.सिलोररोड के जैन दादाबाड़ी में हो रही धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्र संत कमल मुनि, कमलेश ने कहा कि व्यक्ति को जीवन सुख शांति से जीने के लिए ऊर्जा का अनुशासित रहकर सही उपयोग करना चाहिए। संत ने कहा कि जिसका जीवन अनुशासित नहीं है उसका जीवन उसके लिए कभी भी दुख दायी हो जाता है। साधना और नियम से आलौकिक शक्ति प्राप्त होती है और इसी से व्यक्ति इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में आसक्ति के चलते वह संसारी बना रहता है आैर ईश्वर की सच्ची साधना से दूर रहता है। संयम ही साधना का निचौड़ है। इसी से जीवन में अहिंसा का भाव बना रहता है।
उन्होंने व्यक्ति के जीवन में नियम पालन का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों के जीवन में कोई भी नियम किसी दबा