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अस्पताल की लैब में ब्लड ग्रुप की जांच गलत
भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष माधवप्रसाद विजयवर्गीय ने बताया कि पहले भी इस तरह की गलतियां हुई है, लेकिन अधिकांश परिजनों मरीजों को पहले से ही अपने ब्लड ग्रुप की पहचान होने से ये गलत रिपोर्ट जानलेवा बनने से बच जाती है। लेकिन, ऐसे लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो किसी दिन किसी मरीज की जान जा सकती है। इसके अलावा कई नर्सिंग स्टाफ को सैंपल लेना नहीं आता है। तो कई मरीजों की सैंपल रिपोर्ट ही गायब हो जाती है। फिर उसे दोबारा ब्लड का सैंपल देना पड़ता है। वहीं जांच रिपोर्ट बिना ब्लड बैंक प्रभारी के हस्ताक्षर के दी जा रही है जो और बड़ी लापरवाही है।
भास्कर न्यूज|बूंदी
मुख्यमंत्रीनि:शुल्क जांच योजना के तहत जिला अस्पताल की लैब में एक महिला की ब्लड ग्रुप की जांच गलत आने का मामला सामने आया है।
जानकारी के अनुसार मीरागेट जवाहर नगर निवासी राजू बाई प|ी जगदीश स्वामी की दो दिन पहले तबीयत खराब हो गई थी। बाद में उसने डॉ. प्रभाकर विजय को दिखाया। उन्होंने उसे ऑपरेट करने के लिए हिमोग्लोबिन, बीटी , सीटी ब्लड ग्रुप की जांचें लिखी। राजू बाई ने जिला अस्पताल की लैब से ये जांचें करवाई। इनकी रिपोर्ट मरीज के पति को गुरुवार को मिली। उसमें मरीज का ब्लड ग्रुप नेगेटिव बताया गया, जबकि की मरीज का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव है और इसी ग्रुप का ब्लड एक बार राजू बाई को चढ़ाया जा चुका है। ऐसे में राजू बाई के पति ने इस गलत रिपोर्ट को डॉ. प्रभाकर को दिखाया तो वे भी चकित रह गए। वे खुद पीएमओ के पास गए और कहा कि इस मरीज का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव ही है। बाद में उसकी जांच रिपोर्ट पीएमओ से सही करवाई गई। यही नहीं जांच रिपोर्ट पर ब्लड बैंक प्रभारी के हस्ताक्षर भी नहीं थे। महिला के पति का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से उसकी प|ी की जान जा सकती थी। ऐसे में लापरवाह कर्मचरियों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
^यहमामला सामने आया है, संभवत जान बूझकर किसी ने ऐसा नहीं किया है। काम का अधिक भार होने से सैंपल पर ही ब्लड ग्रुप की पर्ची गलत लग गई होगी। फिर भी इस मामले को दिखवाया जा रहा है तथा आगे ऐसी गलती ना हो इसके निर्देश दिए हैं। - डॉ.गजानंद वर्मा, पीएमओजिला अस्पताल, बूंदी