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नेशनल हाइवे की दुर्दशा सुधरने की जगी उम्मीद
पानी लेने के लिए सड़क खोद कर बनाई सुरंग
सड़कें जर्जर, रोडवेज को रोज एक लाख का नुकसान
भास्कर वॉच| गड्ढों वाली सड़कों से फूट रहे बसों के टायर-ट्यूब, टूट रही कमानियां, बढ़ गया डीजल खर्च, यात्रियों को हो रही देरी, वहीं नेशनल हाइवे 148डी सड़क की दुर्दशा पर कोटा डिवीजनल कमिश्नर अश्विनी भगत ने जताई चिंता
क्या है मामला: उनियारा-नैनवां-जजावर-बूंदी मार्ग एमडीआर-52 को साल 2011 में केंद्र सरकार ने नेशनल हाइवे 148डी घोषित किया था। इसी वर्ष पीडब्ल्यूडी ने इस सड़क मार्ग पर एनएच ऑथोरिटी को हेंडओवर कर दिया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने इस सड़क की मरम्मत, पेच रिपेयर का कार्य करना बंद कर दिया। वहीं नेशनल हाइवे ऑथोरिटी द्वारा भी इस सड़क की मरम्मत नहीं कराई। इसके चलते सड़क की साल दर साल दुर्दशा होती गई और सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए। कई किलोमीटर तक सड़क पर से डामर का नामोनिशान तक मिट गया। इतना ही नहीं जहां डामर नहीं है वहां सड़क की दुर्दशा मिट्टी की सड़क से भी बुरी हो गई है।
कालबेलिया कॉलोनी में सड़क काटकर बनाई सुरंग, जिसे बबूलों से ढक दिया।
भास्कर न्यूज| बूंदी
बारिशका दौर थमने के बाद भी सड़कों पर जगह-जगह हुए गड्ढों से रोडवेज बसों की हालात खराब हो रही है। स्थिति यह है कि रोजाना दस से अधिक कमानियों के पत्ते रास्ते में ही टूट रहे हैं। करीब तीन बसों के टायर फूट रहे हैं। डीजल का एवरेज भी कम निकल रहा है। इससे रोडवेज को रोजाना करीब एक लाख रुपए का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। टायर फूटने से या कमानी टूटने से बीच रास्ते में बस रुक जाती है। ऐसे में यात्रियों को गंतव्य स्थान पर पहुंचने के लिए अधिक समय लगता है।
कई स्थानों पर सड़कें इतनी उखड़ गई कि दूर-दूर तक डामर ही नजर नहीं आता। जर्जर खस्ताहाल सड़कों से रोजाना रोडवेज बस सेवा बाधित हो रही है। हर महीने करीब 30 लाख रुपए के टायर-ट्यूब, कमानी-पत्तों के टूटने से बूंदी डिपो को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। डीजल इंचार्ज महेंद्रसिंह मीणा ने बताया कि रोड खराब होने से बसें एवरेज कम निकाल रही हैं। इससे डिपो पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
यूंसमझें रोजाना एक लाख रुपए अतिरिक्त खर्च को
बूंदीरोडवेज बेड़े में अभी 92 रोडवेज बसें हैं। इनमें से अगस्त महीने में 80 टायर फूटे थे। एक टायर का जोड़ा करीब 14000 रुपए में आता है। ऐसे में इन टायरों की कीमत 11 लाख 20 हजार रुपए ह