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रुहानी गुरमत समागम शुरू

5 वर्ष पहले
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बूंदी|बाईपास रोडस्थित गुरुद्वारा लंगर साहिब में गुरुवार को तीन दिवसीय रुहानी गुरमत समागम की शुरुआत हुई।

पहले दिन दीवान सजाया गया, जिसमें शहर सहित दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में संगत ने भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में रतवाड़ा साहिब (चंडीगढ़) से आए बाबा लखबीरसिंह ने कहा कि यह संसार एक रैन बसेरा है, जिसे इंसान भूला है। वह सपनाें में जीता है। शारीरिक रूप से सोए मनुष्य को तो कोई भी जगा सकता है, पर जो मन से सोया है उन्हें सांसारिक मनुष्य नहीं जगा सकता। उसे तो केवल सदगुरु की कृपा ही जा सकती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य मेरी-मेरी मत कर। इस तन, धन गुमान क्यों करता है। यह सब एक दिन साथ छोड़ जाएगा। बचपन को जवानी, जवानी को बुढ़ापा और बुढ़ापे को मौत खा जाती है तो फिर मान किस बात का करना। परमात्मा को भुलाने से ही मनुष्य दुखी है। उसका सिमरन करने, नाम जपने से ही मनुष्य सुखी हो सकता है। इसके बाद गुरु का अटूट लंगर वरताया गया।

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सभी सदस्यों ने अपनी सेवा दी। मुख्य ग्रंथ कृपालसिंह छाबड़ा ने बताया कि शुक्रवार शनिवार को भी सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक दीवान सजेगा।

बूंदी। बाईपास स्थित गुरुद्वारा लंगर साहिब में सजाया गया दीवान।

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