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अरिष्ट निवारक पंच बालयति तीर्थधाम के शिलान्यास में उमड़े समाजबंधु

6 वर्ष पहले
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प्रवचनकेशरी जैन मुनि विश्रांतसागर महाराज के सान्निध्य मेें रविवार को कस्बे में अरिष्ट निवारक पंच बालयति तीर्थधाम का शिलान्यास किया गया। सुबह श्रीपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य द्वारा जलाभिषेक एवं नित्य पूजा के बाद शोभायात्रा शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में जैन समाजबंधुओं ने भाग लिया।

शोभायात्रा तहसील चौराहा, बस स्टैंड, सूर्यमल्ल मिश्रण चौराहा होते हुए छोटी फैक्ट्री के पास स्थित अरिष्ट निवारक धाम पहुंची। यहां आचार्य मनीष शास्त्री द्वारा किए गए वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कमला बाई, भागचंद, अरविंदकुमार, वीरेंद्रकुमार ने परिवार सहित द्वीप प्रज्ज्वलन किया। इसके बाद प्रेमचंद, विकासकुमार, अविनाश ने कार्यक्रम का ध्वजारोहण किया। सूरज कंवर, महावीरप्रसाद, बाबूलाल, अशोककुमार गोधा ने शिलान्यास किया। इससे पहले कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी, भीलवाड़ा सांसद सुभाष बहेड़िया, बूंदी विधायक अशोक डोगरा ने शिलान्यास पटि्टका का अनावरण किया। कार्यक्रम में हिंडौली सहित बूंदी, कोटा, भीलवाड़ा, टोंक, जयपुर, बारां आदि स्थानों से समाजबंधुओं ने भाग लिया।

केसरियापताकाओं से सजा कस्बा: अरिष्टनिवारक पंच बालयति धाम के शिलान्यास समारोह के लिए कस्बे को केसरिया पताकाओं से सजाया गया। शोभायात्रा में पारस प्यारा लागे, णमोकार महामंत्र की ध्वनियां गूंज रही थी। युवक, युवतियां नृत्य करते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए। दो दर्जन से अधिक स्वागत द्वार बनाए, जहां विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। कस्बे में स्थित अरिष्ट निवारक पंच बालयति धाम शिलान्यास समारोह में प्रवचन देते हुए जैन मुनि विश्रांतसागर महाराज ने कहा कि गुरु के आशीर्वाद से सभी कष्टों का निवारण होता है। हमेशा सत्य का साथ देना चाहिए। जब सत्य की बात हो और परिवारजनों में से कोई एक को चुनना पड़े तो हमें हमेशा सत्य एवं धर्म को चुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति गलत कार्य में भी साथ देता है तो वह दोषी कहलाता है। पद एवं प्रतिष्ठा बाद में होती है पहले व्यक्ति होता है। उन्होंने पाश्चात्य विचारधारा का विरोध करते हुए कहा कि वर्तमान में व्यक्ति दिखावा करने के लिए धर्म का सहारा लेता है जो अनुचित है। हमें पाश्चात्य विचारधारा को छोड़कर भारतीय संस्कृति को अपनाना चाहिए। भारतीय संस्कृति सभी संस्कृतियों की जननी है। सागर ने कहा कि कस्बेे में बन रहे बालयति धाम भारत के प्रसिद्ध धामों में शुमार होगा। यहां पर वृद्धाश्रम, बालिका विद्यालय, आश्रम, अस्पताल, विश्राम स्थल बनाया जाएगा, जिसका निर्माण कार्य इस वर्ष के अंत में पूरा हो जाएगा।

संस्कारसिखने से आते हैं: सैनी: कार्यक्रमको कृषि मंत्री सैनी ने संबोधित करते हुए कहा कि संस्कार सिखने से आते हैं। व्यक्ति को चिंतन एवं मनन से धम की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम मनुष्य तो है, लेकिन मनुष्यता का अभाव है। हमें हमारी संस्कृति को भुलकर पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं, ये घातक है। आज पूरा देश वैलेंटाइन डे मना रहे हैं, लेकिन संस्कार भूल रहे हैं।

हिंडौली. बालयति तीर्थ धाम का शिलान्यास पटि्टका का अनावरण करते कृषि मंत्री।