शोपीस बने मिड-डे-मील के सिलेंडर
राष्ट्रीयपोषाहार योजना के तहत स्कूलों में भोजन पकाने के लिए दिए गए गैस सिलेंडर भी पिछले चार महीनों से भटि्ठयों और चूल्हों के अभाव में बेकार पड़े हुए हैं।
अनदेखी के कारण स्कूलों में गैस पर मिड-डे मिल नहीं बन पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भाेजन बनाने के लिए बड़ी मुश्किल से ईंधन उपलब्ध हो पाता है। गीली लकड़ियों कंडों से भोजन पकाने में अधिक श्रम समय लगता है और स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के दौरान अक्टूबर माह में मिड-डे-मील योजना को रसोई गैस से पोषाहार पकाने से जोड़कर जिला परिषद ने स्कूलों को गैस सिलेंडर एवं अन्य सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए थे। इसके लिए जिले की विभिन्न गैस एजेंसियों के खाते में प्रति स्कूल 4650 रुपए के हिसाब से लाखों रुपए जमा करवाए और प्रधानाध्यापकों को गैस सिलेंडर लाने के लिए पाबंद कर दिया था। जानकारी के अनुसार छबड़ा उपखंड में करीब 50 से अधिक स्कूलों ने गैस एजेंसी से दो-दो सिलेंडर, एक रेगुलेटर, नलची लाइटर प्राप्त किए। लेकिन गैस चूल्हा या भट्टी उपलब्ध नहीं होने से सिलेंडर शोपीश बनकर रह गए हैं। गैस एजेंसी संचालकों ने भी चूल्हों या भटि्टयों की राशि नहीं आने की बात कहकर देने से मना कर दिया। इस मामले में निधि गैस एजेंसी संचालक नवीन अग्रवाल का कहना है कि सिलेंडर की राशि खातों में जमा हुई है एवं लगभग 70 प्रतिशत स्कूलों को सिलेंडर दिए जा चुके हैं। चूल्हों का हमारे पास कोई बजट नहीं आया है।
^चुनावके चलते चूल्हों के टेंडर जारी नहीं किए गए। 10 फरवरी के बाद टेंडर जारी किए जाएंगे। अधिक बच्चों के लिए खाना बनाने के लिए बड़े चूल्हे चाहिए थे। िशवप्रसादएम नकाते, सीईओ जिला परिषद