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कई नेताओं का रिपोर्ट कार्ड सुधार गए चुनाव
सुमन अब तक की सबसे युवा जिला प्रमुख
नवनिर्वाचितजिला प्रमुख सुमन रायला झुंझुनूं में अब तक की सबसे युवा जिला प्रमुख हैं। वे 27 साल की आयु में इस पद पर पहुंच गईं। यहां जिला परिषद बने 55 साल हो चुके हैं और अब तक नौ जिला प्रमुख रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा उम्र में डॉ. हनुमान प्रसाद प्रमुख बने थे। श्रीराम बासोतिया, हरदेवसिंह भारु, प्रहलाद पुहानिया, मदन गिल जिला प्रमुख बने तब इनकी उम्र चालीस साल के ऊपर थी।
झुंझुनूं . जिले में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में भाजपा कांग्रेस का प्रदर्शन करीब-करीब बराबर का रहा। भाजपा ने उपप्रमुख समेत प्रधान के पांच पद हथियाए जबकि कांग्रेस जिला प्रमुख का पद बचाने में कामयाब रही। साथ ही तीन पंचायत समितियों में अपने प्रधान भी बना लिए। चुनाव से जिले के कई दिग्गज नेताओं की राजनीतिक साख और धाक बढ़ी है।
{ कुछ हाशिए पर चले गए जिनकी भूमिका की पार्टी स्तर पर भी जांच की जा रही है। वैसे सांसद संतोष अहलावत, मंडावा विधायक नरेंद्र कुमार, पूर्व विधायक रीटा चौधरी, डॉ. चंद्रभान की चुनाव में विशेष भूमिका नजर नहीं आई। शुभकरण चौधरी के क्षेत्र उदयपुरवाटी में प्रधान कांग्रेस की बनी हैं। इन चुनावों में नेताओं का रिपोर्ट कार्ड...
जिला प्रमुख वर्ष उम्र
शीशरामओला 1961 35
बृजेंद्र ओला 1988 36
बृजेंद्र ओला 2000 48
डॉ. राजबाला 2005 51
डॉ. हनुमान प्रसाद 2010 74
प्रतिभासिंह : विधायकरह चुकीं प्रतिभासिंह को इस चुनाव में करारा झटका लगा। चुनाव के कुछ दिन पहले डॉ. राजकुमार शर्मा को नवलगढ़ क्षेत्र के टिकट बांटने का जिम्मा दे दिया गया। इससे नाराज प्रतिभा ने पंचायत समिति सदस्य का चुनाव निर्दलीय लड़ा। जीतकर वे भाजपा में शामिल हुई लेकिन प्रधान पद पर हार गईं।
श्रवणकुमार : बेटेप्रवीण कुमार को जिला परिषद का चुनाव रिकार्ड मतों से जिताया लेकिन सूरजगढ़ विधानसभा क्षेत्र की दोनों पंचायत समितियों सूरजगढ़ बुहाना में कांग्रेस के प्रधान नहीं बनवा सके। उप प्रमुख के चुनाव में भी पार्टी प्रत्याशी रचना यादव हार गईं। माना जा रहा है कि क्रॉस वोटिंग श्रवणकुमार खेमे के कुछ जिला परिषद सदस्यों की ओर से हुई।
ओमप्रकाशआबूसरिया : भाजपासहकारिता प्रकोष्ठ के वरिष्ठ नेता की प|ी इंद्रमणि जिला प्रमुख का चुनाव हार गईं। जिला परिषद सदस्य का चुनाव भी इंद्रमणि काफी संघर्ष में जीत पाई हैं। जिला प्रमुख पद पर पार्टी ने इंद्रमणि को दो बार प्रत्याशी बनाया।
पूरणमलसैनी : जिलेमें बसपा के एक मात्र विधायक पूरणमल सैनी की प|ी संतोष अपने मूल गांव गाडराटा में सरपंच का चुनाव हार गई। साथ ही खेतड़ी में प्रधान उपप्रधान पद भी भाजपा के खाते में गए। बसपा की टिकट ही ज्यादा नहीं बंटी। जो चुनाव लड़े भी तो हार गए।
सुंदरलाल : बेटेकैलाश मेघवाल को निर्दलीय चुनाव लड़वाया। निर्दलीय होने निर्दलीयों का पंचायत समिति में बहुमत होने के बावजूद कैलाश चिड़ावा के प्रधान भी बने। हालांकि सिंघाना में सरपंच पद पर उनकी पुत्रवधू चंपा हार गई।
दाताराम गुर्जर : विधानसभा चुनाव हार चुके भाजपा नेता दाताराम गुर्जर की बेटी मनीषा गुर्जर खेतड़ी की प्रधान बनी है। लगातार दो विधानसभा चुनाव हारने से उनकी पकड़ कमजोर मानी जा रही थी।
डॉ.राजकुमार शर्मा : चुनावसे कुछ दिन पहले ही कांग्रेस के साथ आए पूर्व चिकित्सा राज्यमंत्री नवलगढ़ विधायक डॉ. राजकुमार शर्मा ने अपने क्षेत्र में कांग्रेस को जिला परिषद की सभी 5 सीटें जिताईं। बहुमत नहीं होने के बावजूद प्रधान उपप्रधान बनाकर पार्टी में वापसी को सही साबित किया। कांग्रेस का जिला प्रमुख बनाने में भी मजबूत भूमिका मानी जा रही है।
बृजेंद्रओला : झुंझुनूंविधायक रणनीति में कामयाब रहे। जिला परिषद में 17-17 सदस्य एक निर्दलीय सदस्य आए। इस परिस्थति में भी वे अपने खेमे की प्रमुख बनवा सके। झुंझुनूं पंचायत समिति में भी अपने खेमे की सुशीला सीगड़ा को प्रधान राजेंद्र मील को उपप्रधान बनकर ओला परिवार की प्रतिष्ठा बनाए रखी।