पेट के कीड़े खत्म करने वाली दवा लेने से शेखावाटी में 200 बच्चे बीमार
नीमकाथाना, खाटू सहित कई जगह सामने आए मामले
भास्कर न्यूज | सीकर/चूरू/झुंझुनूं
डीवार्मिंग डे पर बुधवार को सरकार की तरफ से प्रदेशभर में बच्चों को अलबेंडा जॉल (पेट के कीड़े मारने की दवा) पिलाई गई। इस दवाई को पीते ही शेखावाटी के विभिन्न इलाकों में करीब 200 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। इससे स्कूलों अन्य संस्थानों में अफरा तफरी मच गई।
बच्चों को अस्पताल ले जाया गया और इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। कई जगह परिजनों ने भी इसको लेकर हंगामा किया। आरोप लगाया कि बच्चों को भूखे पेट दवा दे दी गई। सीकर के पलथाना में 40, झुंझुनूं में 75 रतनगढ़-तारानगर में 41 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। इसके अलावा भी कई बच्चे बीमार हो गए। चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि इस दवाई के कुछ साइड इफेक्ट आते हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले साल भी दवा पिलाने से कई बच्चों की तबीयत बिगड़ गई थी।
रतनगढ़ तारानगर में भी 41 बच्चे बीमार
रतनगढ़तारानगर में भी 41 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। रतनगढ़ के एक सरकारी स्कूल में 16 छात्राओं को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई। यहां राजकीय संचियालाल बैद बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल में 149 छात्राओं को दवा पिलाई गई थी। छात्राओं की तबीयत खराब होने के बाद पुलिस अस्पताल पहुंची। पुलिस के अधिकारियों ने स्कूल प्रशासन शिक्षा विभाग के अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। स्कूल प्रशासन ने बताया कि शेष बची 250 टेबलेट पुलिस को सौंप दी गई। तारानगर के स्कूल में भी 25 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। डॉ. पंकज शर्मा ने बताया कि इलाज के बाद बच्चे सामान्य हो गए। मामले में चूरू के सीएमएचओ डॉ अजय चौधरी का कहना है कि टेबलेट लेने से कोई रिएक्शन नहीं हुआ है। सभी छात्राओं को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। टेबलेट से पेट दर्द होना स्वाभाविक है।
अजमेर में छह और हिंडौन में पांच को भर्ती कराया
अजमेरके निजी स्कूल में छह बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जेएलएन अस्पताल में भर्ती कराया गया।उदयपुर में भी दवा खाने के बाद जी मिचलाने की शिकायत के बाद चार बच्चों को अस्पताल भेजा गया। हिंडौन में पांच बच्चों की हालत बिगड़ी।
झुंझुनूं जिले में भी 75 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई, इनमें 57 चिड़ावा के थे। टेबलेट निगलने के कुछ मिनट बाद ही बच्चे जी मिचलाने, चक्कर आने, पेट दर्द और उल्टी की शिकायत करने लगे। घबराए शिक्षक 108 एंबुलेंस निजी वाहनों से बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचे। टेबलेट लेने से महर्षि दयानंद माध्यमिक विद्यालय अडूका के 40 और चिड़ावा के वार्ड 11 में संचालित आंबेडकर पब्लिक स्कूल के 8 बच्चे सीएचसी में भर्ती हुए। यहां थानाधिकारी राजेश वर्मा पुलिस टीम अस्पताल पहुंच गई। इसके अलावा जिले के नुआं, नवलगढ़ के सोटवारा, खेतड़ी चिड़ावा के सुल्ताना मंड्रेला में औसतन 2-3 बच्चों की तबीयत बिगड़ी। प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
दो करोड़ 51 लाख बच्चों को पिलानी थी दवा
प्रदेशभर में दो करोड़ 51 लाख 52 हजार 569 बच्चों यह दवाई पिलाने का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए सभी सरकारी निजी स्कूलों, मदरसों में सभी पंजीकृत बच्चों को दवाई पिलानी थी। इसके अलावा यहां नहीं पढ़ने वाले बच्चों को भी घर घर जाकर दवाई पिलाने का लक्ष्य है। पल्स पोलियो की तर्ज पर यह अभियान चलाया गया था।
परिजनोंने सुनाई खरी खोटी
बच्चोंकी तबीयत बिगड़ने से नाराज परिजनों ने भी कई जगह स्कूलों के अध्यापकों चिकित्सकों को खरी खोटी सुनाई। अभिभावकों का आरोप था कि उन्होंने बच्चों को दवाई पिलाने से मना किया था इसके बाद भी उन्हें दवाई पिला दी गई।
पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने समझाइश कर मामले शांत किए।
चिड़ावा. प्राथमिकउपचार देते चिकित्सक-चिकित्साकर्मी।
बिहार, उप्र हरियाणा सहित कई राज्यों में बच्चों को उल्टी-दस्त
{बिहारमें एलबेंडाजोल दवा खाने के बाद 180 बच्चे बीमार। जुमई, सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारन में सामने आए मामले।
{हरियाणा में 16 बच्चे अस्पताल में भर्ती कराए गए। सोनीपत की हिंदू विद्यापीठ में दवा खाने के बाद बच्चों को उल्टी-दस्त की शिकायत।
{आगरा के फतेहाबाद प्राथमिक स्कूल में 11 बच्चे बीमार, अस्पताल में भर्ती कराए गए।
रतनगढ़। दवा खाने के बाद अस्पताल में भर्ती छात्राएं एवं हालचाल पूछते परिजन अन्य।