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वादे पर अमल करे सरकार

7 वर्ष पहले
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70 रुपए के खाने में सौ किलो की कुश्ती लड़ते हैं हमारे पहलवान

प्रदेशका शिक्षा विभाग पहलवानों को जो भत्ता देता है उसमें तो वे भरपेट खाना भी नहीं खा सकते। सौ से सवा सौ किलो तक वजन वाले बाल पहलवानों का दैनिक भत्ता महज 70 रुपए है। इसमें वे दूध-घी का उपयोग करें, फल-सब्जियां खाएं या अन्य पौष्टिक आहार लें? यह स्थिति जिला राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं के पहलवानों के साथ है।

प्रतियोगिता में घर से दूर जाने वाले नौवीं से 12वीं तक के पहलवान भत्ते के रूप में मिलने वाले 70 रुपए से एक समय का भरपेट खाना नहीं खा सकते। इतना ही नहीं, इस भत्ते में एक और बड़ी विसंगति अचंभित करती है। कक्षा आठ तक के खिलाड़ियों को प्रतिदिन भोजन भत्ता 100 रुपए है। जबकि नौवीं से 12वीं तक के खिलाड़ी उम्र में ज्यादा वजन में अपेक्षाकृत भारी होते हैं। उनकी खुराक भी अधिक होती है लेकिन भत्ता कम दिया जाता है। चिड़ावा में राज्यस्तरीय 59वीं कुश्ती प्रतियोगिता में आए पहलवान रविप्रकाश हनुमानगढ़, सुनील भरतपुर, लवीश जोशी, शंभुलाल सैन धीरज चौधरी भीलवाड़ा और झुंझुनूं के भवानीसिंह एवं परमजीत बताते हैं कि परिजनों की मदद और कोच के प्रोत्साहन के चलते ही दंगल में जा पाते हैं। वरना सरकारी नीति तो कभी से चित्त करवा चुकी होती।

^हरियाणा, पंजाब और दिल्ली की तरह राजस्थान में भी पहलवानों के लिए संसाधन सुविधाएं बढ़ानी चाहिए। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके अच्छे परिणाम मिलेंगे। उन्होंने राज्य के स्कूली खिलाड़ियों को मिलने वाले भोजन भत्ते सुविधाओं को नाकाफी बताया। -महासिंहराव, अंतरराष्ट्रीयकुश्ती कोच एवं द्रोणाचार्य अवार्डी

^खेलसंघों एवं राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त खिलाड़ियों के मार्फत हम राज्य सरकार तक बाल पहलवानों के लिए भत्ता बढ़ाने की मांग पहुंचाएंगे। झुंझुनूं जिले में खेल यूनिवर्सिटी जल्द शुरू होने से भी खेल प्रतिभाएं निखरेंगी।- राजेंद्रपालसिंह,कुश्तीकोच, झुंझुनूं

^स्कूलस्तर पर भत्ता 70 रुपए ही है। यह कम तो है ही। काउंसिल जो प्रतियोगिताएं करवाती हैं उनमें जरूर भत्ता ठीक है।- गुलजारीलालजानू, डीईओ(शारीरिक शिक्षा), झुंझुनूं

चिड़ावा. प्रतियोगितामें आए भरतपुर, भीलवाड़ा, झुंझुनूं एवं अजमेर के 100 120 किलो भारवर्ग के पहलवान।