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ऐसे प्रयास सभी जगह हो, तो बचाई जा सकती है जानें

7 वर्ष पहले
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यूनिसेफ के राज्य चीफ सेमुअल मौंगनिज ने शनिवार को राजकीय महिला एवं बाल अस्पताल में एफबीएनसी एवं एमटीसी सेंटरों का निरीक्षण किया। तीन साल में आए परिवर्तन को देख अचरज जताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास राज्य या देश में सभी जगह पर हो तो, कुपोषण ग्रसित एवं नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में जबरदस्त कमी लाई जा सकती है।

निरीक्षण के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि 2010 में विजिट किया था और आज फिर विजिट करने आया हूं। यहां की एमटीसी एवं एफबीएनसी सेंटर में उम्मीद से भी अधिक डवलप देखने को मिला है। इसी कारण यहां पर नवजात शिशु एवं कुपोषित बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है। उन्होंने बताया कि इतना डवलपमेंट होने का श्रेय यहां की टीम वर्क एवं लीडरशिप को जाता है। ऐसे प्रयास राज्य में सभी जगहों पर होने चाहिए ताकि नवजात शिशुओं एवं कुपोषित बच्चों की बड़ी संख्या में जानें बच सके। उन्होंने बताया कि पूरे देश में हाथ धुलाई की बात हो रही है लेकिन, यहां पर एफबीएनसी एवं एमटीसी में प्रत्येक बच्चे को हाथ लगाने से पहले चिकित्सक एवं कार्मिक हाथ धोने की आदत देखकर विश्वास हुआ कि सरकार की योजना कारगर साबित हो रही है। उन्होंने एफबीएनसी के इंचार्ज डॉ. जयसिंह मीणा एवं उनकी टीम की तारीफ की। जयपुर यूनिसेफ के वॉश कंसल्टेंट कुमार विक्रम, डॉ. दिनेश कांठेड मौजूद थे।

िचत्तौड़गढ़. यूनिसेफके मौंगनिज को जानकारी देते डा. मीणा।

पैरवी करेंगे सरकार से

यूनिसेफके राज्य चीफ सेमुअल मौंगनिज ने बताया कि यहां की एफबीएनसी को रीजनल ट्रेनिंग सेंटर, एनएनएफ से अधिकृत कराने एवं मैन पावर की कमी को दूर करने की सरकार से पैरवी करेंगे। उन्होंने बताया कि एनएनएफ से अधिकृत होने पर एफबीएनसी को अलग से फंड मिलेगा और विस्तार होगा।