कुछ लौटे, कुछ अटक रहे
जम्मू कश्मीर से लौटे विकास चावला की जुबानी
भास्कर न्यूज. चित्तौड़गढ़
जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ से कुछ लोग बचकर गए हैं, वहीं कुछ अभी भी कश्मीर में ही अटके हुए हैं। लौटकर आने वाले लोगों समेत उनके परिजन ईश्वर का धन्यवाद कर रहे हैं।
गांधीनगर क्षेत्र के सेक्टर पांच के निवासी कैलाशचंद्र चावला का बेटा विकास शनिवार दोपहर अपने घर लौटा तो परिजनों के चेहरे खुशी से चमक उठे। कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी की इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच प्रथम वर्ष में पढ़ रहे विकास चावला ने बताया कि वह दो महीने से कश्मीर में था। छह सितंबर को श्रीनगर के निचले इलाकों में पानी घुस गया। उनका इंस्टीट्यूट सुरक्षित क्षेत्र में होने से आठ सितंबर की रात को पानी आना शुरू हुआ। इस पर उनके हॉस्टल के करीब 1600 छात्रों को एक किमी दूर कश्मीर यूनिवर्सिटी में शिफ्ट किया गया। लौटने में काफी परेशानी आई। आने के लिए दो विकल्प थे। पहला लगभग चार से पांच फीट पानी में होकर दो किमी दूर सुरक्षित जगह निकलना या महंगा वाहन किराए कर लौटना। मैंने अन्य 11 साथियों के साथ महंगे वाहन को चुना। ड्राइवर ने 250 किमी दूर एयरपोर्ट पहुंचाने के लिए प्रत्येक छात्र से डेढ़ हजार रुपए लिए। एयरपोर्ट पहुंचे तो वहां तीन-चार हजार लोग अपने गृह क्षेत्र लौटने के लिए इंतजार कर रहे थे। सेना के मालवाहक विमान में लगभग 62 जनों के साथ मैं दिल्ली पहुंचा और वहां से ट्रेन में घर लौटा।
बाढ़वहां, चिंतित परिजन यहां : विकासके बड़े भाई संजय चचेरे भाई गोपाल ने बताया कि छह सितंबर को पापा ने विकास से बात की, तो हॉस्टल में बाढ़ का पानी घुसने का पता चला। बीच में बैटरी डिस्चार्ज होने नेटवर्क नहीं मिलने से बात नहीं हो पाई तो परिजन चिंतित हो गए। शनिवार को विकास घर लौटा तो पापा कैलाशचंद्र, मम्मी मंजूदेवी, भाई संजय बहन निर्मला समेत अन्य परिजनों की सांस में सांस आई।
घंटों वेटिंग के बाद होती थी मोबाइल पर बात
विकासने बताया कि हालात यह थे कि मोबाइल नेटवर्क ऊंचे जगहों या भवन पर ही मिल रहा था। इससे मोबाइल फोन पर बात करने के लिए सुबह साढ़े छह बजे से लाइनें लगती थी। कई घंटों की वेटिंग के बाद बात हो पा रही थी।
राजस्थान के 300 से ज्यादा छात्र फंसे
विकासचावला ने बताया कि उनके इंस्टीट्यूट में दो हजार से ज्यादा विद्यार्थियों में से राजस्थान के