पांच-छह किमी पानी में चलकर बचाया खुद को
जम्मू-कश्मीरमें 10 दिन पहले आई बाढ़ अब महामारी का सबब बनने की ओर बढ़ रही है। खाने-पीने की कमी और तपते बुखार के बावजूद चार-पांच किलाेमीटर पानी में चले, तब जाकर सुरक्षित जगह पहुंच पाए। ईश्वर की कृपा से अब घर पहुंच पाया हूं।
यह कहना था चंदेरिया हाउसिंग बोर्ड निवासी तुषार पुत्र अनिक्षित श्रीवास्तव का। तुषार कश्मीर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी में एमटेक द्वितीय वर्ष का छात्र है। सोमवार को घर पहुंचे तुषार ने बताया कि गत आठ सितंबर को उसके इंस्टीट्यूट में पानी घुसना शुरू हुआ। छात्रों को कश्मीर यूनिवर्सिटी में शिफ्ट किया गया। तीन हजार छात्रों में से 1500 छात्र पहले दो दिनों में वहां से रवाना हो गए। खाने-पीने के लाले पड़ने लगे। सबसे अंत में मेरे अलावा कुछ अन्य साथी 12 सितंबर को वहां से निकल पाए। रास्ते के हालात देखकर मन सिहर उठता है। पांच दिन से बुखार रहा था, लेकिन किसी तरह निकला। घर पहुंचा तो पिता अनिक्षित श्रीवास्तव, माता लक्ष्मी तथा छोटी बहन स्वाति की जान में जान आई।
सड़ांध मार रहे थे मृत मवेशी
रास्तेमें पांच-छह किलोमीटर पैदल चले तो सड़क किनारे तबेलों में मृत मवेशी पानी में सड़ रहे थे। पानी तक सड़ांध मार रहा था। अब ऐसी हालत में वहां महामारी का खतरा बढ़ गया है।
चित्तौड़गढ़ | बाढ़के बाद श्रीनगर एयरपोर्ट पर अपने घर जाने के लिए इंतजार करते छात्र
20 किमी का किराया 10 हजार
तुषारश्रीवास्तव ने बताया कि यूनिवर्सिटी से निकलने के बाद हजरतबल दरगाह पहुंचे। वहां से एयरपोर्ट 20 किलोमीटर दूर है। वहां पहुंचने के लिए एक ट्रक मिला, जिसके ड्राइवर ने प्रत्येक छात्र से एक हजार रुपए किराया मांगा। कई छात्रों के पास तो रुपए पूरे नहीं थे। एक-दूसरे की मदद से छात्र एयरपोर्ट पहुंचे। 20 किमी पहुंचाने के ड्राइवर ने लगभग सौ छात्रों के हिसाब से दस हजार रुपए लिए। एयरपोर्ट आने के बाद सेना के विमान से अमृतसर पहुंचा और वहां से दिल्ली आने के बाद ट्रेन से घर पहुंचा।