चित्तौड़गढ़। घर से बाहर निकलते ही मोयले लोगों को परेशान कर रहे हैं। वाहन चालक तो मोयले के आगे पूरी तरह बेबस हैं। अचानक आंखों में घुसने से रोज दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसका हल किसी के पास नहीं है। सिर्फ सुरक्षा के साधन अपनाने से ही इससे बचा जा सकता है।
शहर में इन दिनों मोयले का प्रकोप है। इसका जीवन काफी छोटा (मात्र सात दिन) होता है लेकिन, ये वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो रहे हैं। सड़क पर पैदल राहगीर भी इनसे परेशान हैं। इससे बचने के लिए लोगों को मुंह पर कपड़ा बांधकर या चश्मे का सहारा लेकर निकल रहे है।
ये रखें सावधानी
मुंह को मास्क या कपड़े से ढंकें। दोपहिया वाहन चलाते वक्त हेलमेट बहुत ही कारगर है। आंख में मोयला चला जाए तो मसले नहीं। आंख बंद कर पुतलियों को घुमाएं। आंसू से एफिड का असर कम हो जाता है।
चित्तौड़गढ़ | पत्नी की आंख में गिरा मोयला निकालते हुए युवक।
मोयला का जीवनकाल
>मोयले का जूलॉजिकल नाम एफिड है। >इसका जीवनचक्र 5 से 7 दिन होता है। >पूर्ण अवस्था में इनका रंग हरा या काला होता है। >यह एसिडिक प्रजाति का है इसलिए आंखों में गिरने पर जलन होती है। >त्वचा पर मसलने से एलर्जी या अन्य समस्या भी हो सकती है। >एफिड तेज ठंड या ज्यादा गर्मी में प्राकृतिक रूप से नियंत्रित होते हैं।