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स्टेडियम में आयोजनों से खेलों पर पड़ता है असर

6 वर्ष पहले
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चाहेकोई बड़ा चुनाव आए या सुरक्षा और भारी भीड़ के लिहाज से सभा, समारोह हो। प्रशासन और आयोजकों के लिए शहर में इसके लिए अभी भी इंदिरा गांधी स्टेडियम ही एक मात्र विकल्प नजर आता है। दूसरी ओर खेलों से लेकर दौड़ और सुबह की लंबी सैर के लिए भी यही जगह माकूल लगती है। ऐसे में आयोजनों के बाद पसरी गंदगी खिलाड़ियों खासकर खुद को फिट रखने के लिए आने वालों के लिए कई दिन तक परेशानी का कारण बनी रहती है।

हाल में पंचायतीराज चुनाव तथा गणतंत्र दिवस के जिलास्तरीय समारोह के बतौर इंदिरा गांधी स्टेडियम प्रशासन के खूब काम आया। तीन चरणों में हुई चुनाव की लंबी प्रक्रिया के दौरान अधिग्रहित करीब सात सौ वाहनों का यहां जमावड़ा रहा।

स्टेडियम से सटे शहीद मेजर नटवरसिंह राउमावि से मतदान दलों की रवानगी, अंतिम प्रशिक्षण और फिर मतगणना कार्य तक इस स्टेडियम को वाहन पार्किंग सुरक्षा बंदोबस्त के लिए उपयोग में लिया गया। इसी दरम्यान गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह भी यही हुआ। पर्व मन गया, मतगणना के साथ चुनाव भी पूरे हो गए, लेकिन गंदगी के बतौर रह गए उनके निशान। प्रशासन एवं नगर परिषद ने स्टेडियम की सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। जगह-जगह पर प्लास्टिक थैलियां या कागज उड़ रहे हैं। स्टेडियम में गाजर घास भी पैर फैलाने लगी है। वाहनों की धूम से कई जगह गढ्ढ़े भी पड़े हुए है। यद्यपि मुख्य मैदान और ट्रैक को अायोजनों से खास नुकसान नहीं होने दिया जाता है, पर इसके आसपास और रास्तों में कचरे के कारण आने-जाने वालों को परेशानी होती है।

टक्कर से टूटा गेट बना खतरा

आयोजनोंके दौरान स्टेडियम की पीछे की तरफ यानी भीलवाड़ा बाइपास की ओर का मुख्य प्रवेश द्वार गेट एक वाहन की टक्कर से क्षतिग्रस्त हो गया, जो वर्तमान में खतरे का सबब भी बना है।

कतरानेलगे मॉर्निंग वाक पर आने वाले

अक्सरस्टेडियम में किसी बड़े आयोजन के बाद इसकी सफाई की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं जाता है। इस कारण यहां सुबह-सुबह ताजा हवा लेने एवं अपने आपको फिट रखने के लिए नियमित मॉर्निंग वाक पर आने वाले लोग कतराते है। जबकि यह स्टेडियम शहर में होने और खुली जगह होने के कारण सुबह की सैर खासकर दौड़ और तेज चाल लगाने वालों के लिए सबसे उपयुक्त जगह है।

चित्तौड़गढ़ | स्टेडियममें सड़क के पास बिखरा कचरा और उग रही झाड़ियां।

^यह स्टेडियम नगर परिषद के अधीन आता है। खेल विभाग के पास इतना बजट नहीं होता कि बार-बार इतने बड़े स्टेडियम की सफाई कराई जा सके। हां, यदि कोई संस्था या सामाजिक सराेकार के तहत आमजन स्टेडियम की सफाई में सहयोग करना चाहे तो स्वागत है और हम उनके साथ सहयोग को तैयार है। डीजेपेट्रिक, जिला खेल अधिकारी, चित्तौडग़ढ़