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समस्याओं से जूझ रहे सेगवा हाउसिंग बोर्ड क्षेत्रवासी
उदयपुररोड पर सेंती से आगे सेगवा हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं को भी तरस रहा है। करीब 15 साल पहले बसी इस कॉलोनी में रहने वाले लोग टूटी-फूटी सड़कों, भूखंडों में भरे गंदे पानी सरकारी स्कूल की कमी जैसी समस्याओं से भी जूझ रहे हैं। शहर का हिस्सा होते हुए भी यह क्षेत्र उपेक्षित है।
सेगवा हाउसिंग बोर्ड में सड़कों की हालत देखकर लगता नहीं कि ये क्षेत्र शहर का हिस्सा है। कहीं-कहीं तो सड़कें ही नहीं है। कच्चे रास्तों में बरसात के दिनों में पानी भर जाता है, जिससे निकलना भी मुश्किल हो जाता है। इतने सालों में सड़कों की समस्या का सही तरीके से निराकरण नहीं हो पाया। कॉलोनी में बरसाें बाद नालियां बनी, लेकिन उचित ढलान नहीं दिया गया। इससे नालियाें में पानी भरा रहता है। कॉलोनी में सरकारी स्कूल नहीं है। जिससे बच्चों को पढ़ाई के लिए करीब एक से डेढ़ किलोमीटर दूर सेंती स्कूल में जाना पड़ता है। क्षेत्र के गोपाल सोलंकी, कुसुम चौधरी, अशोक चंडालिया, प्रदीप खत्री, नरेंद्र गौड़, विक्रमसिंह, विनोद, शंकरलाल आदि ने समस्याओं के निराकरण की मांग के लिए कलेक्टर को ज्ञापन भी दिया था।
भूखंडोंमें भरा पानी, खाली मकान खंडहर : हाउसिंगबोर्ड में कई जगह खाली पड़े भूखंडों में पानी भरा हुआ है। गंदे पानी के कारण पैदा हुई बदबू मच्छरों से बीमा
वैशालीनगरमें अतिक्रमण की शिकायत: सेगवाहाउसिंग बोर्ड के पास वैशालीनगर कॉलोनी में मुख्य मार्ग पर कब्जा करने की शिकायत क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से की है। बताया गया कि कॉलोनी के मुख्य मार्ग को एक व्यक्ति ने चारदीवारी बनाकर बंद कर दिया। कॉलोनीवासियों को खाली भूखंडों में से होकर आना-जाना पड़ रहा है। हैंडपंप भी चारदीवारी में गया है।
पार्कों में झाड़-झंखाड़
चित्तौड़गढ़ | हाउसिंगबोर्ड कॉलोनी में सड़कों पर गड्ढों में भरा पानी।
चित्तौड़गढ़ | सेगवाहाउसिंग बोर्ड में डस्टबिन बनकर रह गई पार्क की जमीन।
हाउसिंग बोर्ड में पार्काें के लिए भूमि आरक्षित है, लेकिन उनमें पार्क विकसित नहीं करवाने से वे महज खाली भूखंड बने हुए हैं। इनमें झाड़-झंखाड़ उग आने से पार्क की जगह जंगल जैसे प्रतीत होते हैं। हाउसिंग बोर्ड के 1-सी 2-बी ब्लॉक के बीच पार्क की सुविधा होना नक्शे में दर्शाया गया, लेकिन केवल चारदीवारी बनाकर छोड़ दी गई। लोगों ने इस आरक्षित जगह का उपयोग पार्क के रूप में ह