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उप प्रमुख भी ओबीसी महिला पिंकी अहीर

6 वर्ष पहले
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चित्तौड़गढ़। इस बार जिला परिषद की कमान पूरी तरह महिलाओं के हाथ रहेंगी। भाजपा ने जिला प्रमुख पद पर लीला जाट को बिठाने के बाद रविवार को उप जिला प्रमुख पद पर भी ओबाीसी महिला वर्ग की 22 वर्षीय पिंकी अहीर को काबिज किया। चुनाव में पिंकी अहीर को 16 और कांग्रेस के हनुमंतसिंह बोहेड़ा को नौ मत मिले।

भाजपा की ओर से गर्ल्स कॉलेज की पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और राशमी क्षेत्र से निर्वाचित पिंकी अहीर ने सुबह पार्टी पर्यवेक्षक दामोदर अग्रवाल, जिलाध्यक्ष रतनलाल गाडरी, प्रस्तावक माधवलाल जाट, डेयरी चेयरमैन बद्री जाट, उप जिला प्रमुख मिठूलाल जाट, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष श्रवणसिंह राव, अल्पसंख्यक मोर्चा जिलाध्यक्ष एमडी शेख, एडवोकेट किशनलाल अहीर, नरेंद्र पोखरना कैलाश चौखडा के साथ आकर नामांकन पत्र पेश किया।
कांग्रेस की ओर से डूंगला क्षेत्र से निर्वाचित हनुमंतसिंह बोहेड़ा ने प्रस्तावक शंभूलाल जाट कानसिंह भाटी के साथ पहुंच कर नामांकन पत्र दाखिल किया। दोपहर तीन बजे बाद पहले भाजपा के सभी 16 सदस्य बस से वोट देने आए।
इसके कुछ देर बाद कांग्रेस के सभी नौ सदस्य वोट देने के लिए पहुंचे। मतगणना में दोनों दलों को अपनी पार्टी के संख्या बल के अनुरूप क्रमश: 16 नौ मत मिले।

पहली बार हुआ ऐसा

जिले की सबसे बडी पंचायत में यह पहली बार है कि जिला प्रमुख और उप जिला प्रमुख के दोनों पद महिलाओं के हाथ रहेंगे। वो भी ओबीसी की और 25 साल से कम उम्र की युवा। राजनीतिक परिवार से जुड़ी पिंकी का जन्म आठ मई 1993 को हुआ। पिंकी वर्ष 2013 में जिला मुख्यालय पर कन्या महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष रही और अब एलएलबी कर रही है।
उनके पिता राशमी भाजपा मंडल अध्यक्ष है। भुआ नीरु अहीर चित्तौड़ नपा अध्यक्ष और भाभी उदीबाई सांखली सरपंच रह चुकी।

पिंकी अहीर

चित्तौड़गढ़ | कलेक्ट्रेट में बस से उतरकर मतदान के लिए जाते भाजपा के सदस्य।

पंचायत समिति प्रधान चुनाव में बगावत करने वाले भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष रणजीतसिंह भाटी को पार्टी ने नोटिस जारी किया है। जिलाध्यक्ष रतनलाल गाडरी ने बताया कि भाटी को नोटिस जारी करने के साथ ही प्रदेश नेतृत्व को भी मामले से अवगत कराते हुए रिपोर्ट भेजी गई है। इस संबंध में प्रदेश नेतृत्व आगे की कार्रवाई तय करेगा।
उल्लेखनीय है कि प्रधान उम्मीदवार नहीं बनाए जाने से नाराज भाटी ने शनिवार को कांग्रेस का समर्थन लेकर निर्दलीय चुनाव लड़ लिया। हालांकि उनको चुनाव जीतने में सफलता नहीं मिली और रविवार को हुए उप प्रधान चुनाव में वे कांग्रेस खेमा छोड़कर भाजपा प्रत्याशी नामधराणी को ही वोट देने आए।

एक और जाति को साधा, कपासन का दबदबा

यहभी पहली बार है कि जिला प्रमुख उप जिला प्रमुख दोनों एक ही विस क्षेत्र कपासन की निवासी है। जिला प्रमुख पद तो लगातार दूसरी बार कपासन विस को मिला है। मौजूदा विधायक अर्जुन जीनगर पिछली बार अपने परिवार की सुशीला जीनगर को प्रमुख बनवाने में सफल रहे तो इस बार प्रमुख पद इस विस क्षेत्र की सिंहुपर निवासी लीला जाट को मिलने के बाद उप प्रमुख पद भी उनके इलाके की महिला को ही मिल गया।
उप प्रमुख पिंकी के पिता राशमी मंडल अध्यक्ष रतनलाल अहीर विधायक जीनगर के करीबी है। जिला परिषद के दोनों पदों पर पहली बार एक ही विस क्षेत्र और एक ही महिला वर्ग को काबिज करने का पार्टी का निर्णय सियासी हलकों में चर्चा चौकाने वाला भी रहा, पर माना जा रहा है कि पार्टी ने इसके जरिये एक और जातिगत और राजनीतिक संतुलन को साधने की कोशिश की।
पिंकी के जरिये अहीर जाति को प्रतिनिधित्व देने के साथ जीनगर सहित सभी नेताओं को संतुष्ट रखने का प्रयास भी है। इस निर्णय के पीछे एक वजह यह भी बनी कि इस बार निर्वाचित सदस्यों में सामान्य वर्ग से एक भी पुरुष नहीं है। इस कारण उप प्रमुख पद भी आरक्षित वर्ग के सदस्य को ही दिया जाना मजबूरी बन गया।

भदेसर

नाम: लालसिंह राठौड़
उम्र:48शिक्षा:दसवीं

पृष्ठभूमि:गरदानाके मिन्नाना निवासी लालसिंह पहले भाजपा बाद में कांग्रेस में रहे। उनकी प|ी दो बार सरपंच रही, लेकिन लाल सिंह ने खुद पहला चुनाव लडा और प्रधान बन गए। ट्रक ड्राईवरी के बाद कृषि, ठेकेदारी से जुडे।

डूंगला
नाम: मुकेश खटीक
उम्र: 32
शिक्षा:10वींपास

पृष्ठभूमि : डूंगला निवासी मुकेश खटीक की प|ी लक्ष्मीदेवी पहले पंस सदस्य रही थी। इस बार सामान्य सीट से चुनाव लड़कर जीत दर्ज की। मुकेश विधायक गौतम दक के करीबी है।

चित्तौड़गढ़

नाम: प्रवीणसिंह राठौड़ उम्र:33
शिक्षा:स्नातक
पृष्ठभूमि:ग्रामपंचायत जालमपुरा के ओरड़ी गांव निवासी प्रवीणसिंह राठौड पहले एबीवीपी और फिर भाजपा में सक्रिय हुए। लगातार दो बार जीएसएस अध्यक्ष रहने के अलावा जिला सहकार संघ उपाध्यक्ष हैं। विधायक चंद्रभानसिंह आक्या के करीबी है। उनके पिता हेमसिंह राठौड़ सेवानिवृत मत्सय अधिकारी हैं।
कपासन
नाम: भैरूलाल चौधरी
उम्र: 45,शिक्षा:बीएसैकंड
पृष्ठभूमि:रंडियारडीनिवासी चौधरी इससे पहले पंस सदस्य रह चुके हैं। जाट महासभा ब्लाक अध्यक्ष रहने के अलावा जिला कांग्रेस सचिव भी है। पूर्व सांसद उदयलाल आंजना, गिरिजा व्यास, जिलाध्यक्ष शिवदयाल शर्मा के करीबी माने जाते हैं।

बेगूं
नाम: अंजूदेवी गुर्जर
उम्र:27शिक्षा:बीए
पृष्ठभूमि:सामरिया-सुवानियासीट से जीती अंजू गुर्जर का सुसराल सामरिया पंचायत के सुरतपरिया गांव में है। पति कैलाश गुर्जर जयनगर ग्राम पंचायत में एलडीसी है। कैलाश गुर्जर को विधायक सुरेश धाकड़ का करीबी माना जाता रहा है।

भूपालसागर
प्रधान: सोहनलाल भील उम्र:60
शिक्षा:दसवींपास
पृष्ठभूमि:सोहनलालगत दिसंबर में ही बीएसएनएल में टेलीफोन आपरेटर पद से सेवानिवृत हुए। कानडख़ेड़ा पंचायत के सांवलियाखेड़ा निवासी है। प्रधान सीट एसटी रिजर्व होने के कारण भाजपा ने उनको सामान्य वार्ड से चुनाव लड़ाकर प्रधान बनाया। सोहन भील भाजपा मंडल अध्यक्ष जीतमल जाट के करीबी रहे।

भैंसरोडगढ़
नाम: वीणा दशोरा
उम्र: 28शिक्षा:एमएबीएड
पृष्ठभूमि:झरझनीगांव निवासी वीणा दशोरा का राजनीति में पहला कदम है। साधारण परिवार की वीणा को प्रधान पद महिला आरक्षित होने के साथ युवा और शिक्षित होने का फायदा मिला।

राशमी पंस
नाम: मधु नुवाल
उम्र:31शिक्षा:12वीं
पृष्ठभूमि:मधुनुवाल के पति राकेश नुवाल भाजपा मंडल कोषाध्यक्ष है। आरनी निवासी एडवोकेट नुवाल सरपंच चुनाव लड़ चुके हैं। विधायक अर्जुनलाल जीनगर के करीबी है।

गंगरार
नाम: देवीलाल जाट, उम्र28
शिक्षा:दसवीं
पृष्ठभूमि:नवनिर्वाचित प्रधान देवीलाल जाट इससे पहले पंचायत सोनियाना के दो बार सरपंच रहे हैं। इस बार उनकी प|ी शालिनी पंचायत की सरपंच बनी है। देवीलाल भाजयुमो मंडल अध्यक्ष होने के साथ विधायक सुरेश धाकड़ के करीबी है।

निम्बाहेड़ा
प्रधान: जशोदा मीणा, उम्र25
शिक्षा:एमएप्रीवियस
पृष्ठभूमि:भाजपाकी प्रधान जशोदा मीणा एमए प्रीवियस कर रही है। गादोला निवासी भवानीराम मीणा की पुत्री जशोदा सेगवा निवासी मुकेश मीणा की प|ी है। खेती से जुडे परिवार से पहली बार राजनीति में गई बहू प्रधान बनी है।

बड़ीसादड़ी
प्रधान: चेतना मेघवाल
उम्र:29शिक्षा:एमएबीएड
पृष्ठभूमि:केवलपुरागांव की चेतना राजनीति में आने से पहले बतौर प्रिंसीपल प्राइवेट स्कूल में नियुक्त है। समाजसेवा शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय रही है। पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी के गांव केवलपुरा निवासी नानालाल की प|ी चेतना को इस पद तक पहुंचाने में चौधरी की ही अहम भूमिका रही। पंस की इसी सीट से पिछली बार भाजपा के शंकरसिंह चुनाव जीत कर प्रधान बने थे।