पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • डोडा चूरा लूट हत्या का खुलासा, चार गिरफ्तार

डोडा चूरा लूट हत्या का खुलासा, चार गिरफ्तार

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
फर्जी अफसर बनकर लूटा कंटेनर

क्राइम रिपोर्टर | चित्तौड़गढ़

चित्तौड़ीखेड़ागांव के निकट चित्तौडगढ-कोटा फोरलेन पर रविवार रात बदमाश फर्जी सेलटैक्स आफिसर बनकर गुटखे से भरे कंटेनर को लूट कर फरार हो गए। सदर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार रविवार रात नौ बजे विमल कंपनी के गुटखे लेकर कंटेनर चालक हरियाणा के मेवात जिला निवासी सिराजुद्दीन जोगी खलासी आमीर जोगी अहमदाबाद से कटनी जा रहे थे। चित्तौड़ीखेड़ा के निकट गंभीरी नदी पुलिया के पास सड़क किनारे दो-तीन युवकों ने कंटेनर को रुकवाकर चालक खलासी से कहा कि सेलटैक्स के साहब बुला रहे हैं। बिल्टी दिखाओ। चालक खलासी कुछ दूरी पर खड़ी बोलेरो के पास पहुंचे तो उसमें सवार दो जनों ने सवाल, जवाब करते हुए कागजात में गड़बड़ी की बात कहते हुए पुलिस थाने चलने को कहा। बदमाशों ने कंटेनर चालक खलासी को बोलेरो में बिठा लिया और पीछे साथी युवकों द्वारा कंटेनर लाने की बात बताई गई। कुछ दूरी पर जब बोलेरो सवार लोग कंटेनर में सवार युवकों से कंटेनर की लोकेशन मोबाइल पर पता करने लगे, तब जाकर चालक खलासी को माजरा समझ में आया। रात करीब 11 बजे मंगलवाड में एक होटल तक पहुंचने के बाद चालक हाथ छुड़ाकर भाग गया और ढाबा मालिक को जानकारी दी। इधर, आरोपी खलासी को भी यहीं छोड़कर चले गए। सूचना पर भादसोड़ा एसएचओ ने उच्चाधिकारियों चित्तौडगढ सदर थानाधिकारी को सूचना दी। सदर थानाधिकारी दिनेश सुखवाल ने जिले में कई जगह नाकाबंदी कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पारसोली क्षेत्र में भी हो चुकी है घटना

इसीतरह की वारदात तीन माह पहले पारसोली क्षेत्र में भी फोरलेन पर हो चुकी है। इसमें कोटा की गैंग का नाम सामने आया था। पुलिस अब इस बिंदू को ध्यान में रखते हुए भी जांच कर रही है। पुलिस का मानना है कि फोरलेन की बजाय कंटेनर को सिंगल सड़क से कहीं ले जाने का प्रयास किया गया है।

बेगूं | डोडाचूरा गोदाम लूट हत्या की वारदात में गिरफ्तार आरोपी पुलिस।

वारदात का मास्टर माइंड अफजल

पुलिसने बताया कि वारदात का मास्टरमाइंड अफजल है, जो छह माह पहले तक इसी ठेकेदार का कर्मचारी था। इस दौरान हम्मालों के माध्यम से क्षेत्र से डोडा चूरा एकत्रित करा कर गोदाम में डलवाया था। आरोपी श्यामलाल गुर्जर भी पहले गोदाम में चौकीदार था और राजेश मेघवाल वर्तमान में चौकीदार था। वारदात के दिन उसके पिता कन्हैयालाल मेघवाल चौकीदार कर रहे थे। एसआई महावीरप्रसाद, एसआई शंभूलाल की टीम ने वारदाता का पर्दाफाश करने में अहम भूमिका निभाई। दो माह पूर्व राजसमंद जिले के भीम में भी अफजल उसकी टीम ने डोडा चूरा का ट्रक लूट लिया था। बोरबावड़ी मामले में गिरफ्तार आरिफ भी अफजल अजमेरी का साथी है। पहले कर्मचारी रहते हुए अफजल को गोदाम और यहां तैनात कर्मचारियों आदि की पूरी जानकारी थी। यहां तक कि वो मुनीम ज्ञानजी के पेट की बीमारी से भी परिचित था। इसीलिए पेट में ही मुक्के मारे और हत्या कर दी। बदमाश लूट के लिए ट्रक, टवेरा लेकर आए थे। ज्ञानजी के पास थाने के ड्राइवर बसंत पाराशर के नंबर थे। जिस पर जानकारी देते ही करीब 20 मिनट में पुलिस पहुंच गई।

नकाबपोश लूटेरों का क्लू पुलिस को कर्मचारी राजेश, श्यामलाल गुर्जर अफजल की मोबाइल काल डिटेल से मिला। वारदात में घायलों ने लूटेरो की बोलचाल भाषा एमपी की होना बताया। बोरबावड़ी निवासी राजेश श्यामलाल लूट के षडयंत्र में शामिल थे और अन्य करीब 20 लोग अफजल अपने साथ मध्यप्रदेश से साथ लाया। जिसमें से कुछ को पुलिस ने नामजद कर लिया है। पुलिस का पहला शक कर्मचारियों के लिप्त होने का था। इसी से इस बडी घटना का राजफाश हुआ।

सिर्फ एक टोल नाके पर आई लोकेशन

एसएचओदिनेश सुखवाल ने बताया कि कंटेनर चालक खलासी को कंटेनर से अलग कर बोलेरो में बिठाने के बाद काफी देर तक बदमाशों ने कोटा फोरलेन पर इधर-उधर घुमाया। इस कारण घटनास्थल से मंगलवाड के बीच में तीन घंटे का अंतर रहा है। क्षेत्र के टोल नाकों पर लगे सीसीटीवी फुटेज देखे गए। बस्सी, मंगलवाड गंगरार टोल नाके पर बोलेरो कंटेनर की लोकेशन नहीं मिली, लेकिन कंटेनर की लोकेशन रिठोला टोल नाके पर मिली। अब बोलेरो कंटेनर की तलाश के लिए सिंहपुर टोल नाके से फुटेज लिए जा रहे हैं। अन्य जगहों पर भी पुलिस टीमें भेजी गई है। बोलेरो के जो नंबर सामने आए हैं, वो फर्जी लग रहे हैं।

प्लान के अनुसार काम होता तो नहीं होती हत्या

अफजलबोरबावड़ी में राजेश मेघवाल के मकान में किराये पर रहता था। डोडा चूरा की डिमांड आने पर उसने 25 दिन पहले राजेश मेघवाल श्यामलाल गुर्जर के साथ बेगूं और रायता गांव में अलग-अलग बैठकर लूट की योजना बनाई। इसमें यह तय हुआ कि वारदात के दिन राजेश को गोदाम कर्मचारियों को खाने की दाल में नींद की गोलियां मिला देनी थी। ताकि कर्मचारी नींद में रहेे, लेकिन 26 जनवरी की रात वारदात के समय राजेश बाहर चला गया और उसके पिता कन्हैयालाल मेघवाल चौकीदार थे। अफजल ने अचानक वारदात के लिए आने की सूचना दी। यदि प्लान के मुताबिक वारदात होती तो तोडफ़ोड़, हत्या मारपीट नहीं होती।