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खाद्य सामग्री जांच का काम ठप

7 वर्ष पहले
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नवरात्रशुरू होने के साथ जिलेभर में मेलों त्योहारों का मौसम शुरू हो गया। मेलों और बाजारों में मिठाइयों चाट-पकौड़ी सहित अन्य खाद्य सामग्री के अच्छे दिन है, लेकिन यह सामग्री शुद्घ है या नहीं और लोग मिलावटी सामग्री का शिकार नहीं हो जाए। इस पर निगरानी की फिलहाल चिकित्सा विभाग के पास कोई व्यवस्था नहीं है। कारण, जिले के एक मात्र खाद्य सुरक्षा अधिकारी लंबे अवकाश पर है। इस कारण खाद्य सामग्री जांच व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। चिकित्सा विभाग के आला अधिकारी शिकायत आने के इंतजार में हैं।

जिले में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के दो पद स्वीकृत है, लेकिन एक रिक्त है। जो एक अधिकारी कार्यरत है, वे भी नवरात्र शुरू होने से पहले 23 सितंबर से 14 अक्टूबर तक के लिए अवकाश पर चले गए। हालांकि इसकी वजह परिवार में गंभीर बीमारी बताई जा रही है, पर एक मात्र अधिकारी के लंबे अवकाश पर जाने से खाद्य सामग्री की जांच व्यवस्था गड़बड़ा गई है। खासकर फेस्टिवल सीजन में यह स्थिति विभाग की उपस्थिति और उपयोगिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। विभाग ऐसे समय में दूसरे जिले से किसी खाद्य अधिकारी को यहां डेपुटेशन पर लगवाने या वैकल्पिक व्यवस्था करने में भी नाकाम रहा है। सीएमएचओ ऑफिस में खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्यालय पर ताला लगा है। इस कारण खाद्य लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों को भी बैरंग लौटना पड़ रहा है। गौरतलब है कि नवरात्रि में जिले के प्रमुख शक्तिपीठों सहित दशहरा मेलों में अन्य जिलों तक से हजारों लोग आते हैं। इन मेलों में बड़ी दुकानों से लेकर ठेलों एवं गुमटियों तक पर खाद्य सामग्री की हजारों दुकानें लग रही है।

एक साल से खाली है एक पद

जिलेमें खाद्य सुरक्षा अधिकारी के दो पद स्वीकृत है। मई 2013 में दोनों अधिकारियों के तबादले हुए। इसके बाद एक अधिकारी अगस्त में आए, लेकिन दिसंबर में ही एसीबी के हत्थे चढ़ गए। इसके बाद जिले में दोनों ही पद साढ़े छह महीने तक खाली रहे। सरकार ने गत जून में एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी को लगाया, जो कार्यरत है।

^मेला स्थलों पर चिकित्सा टीमें लगी है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अवकाश पर है। जिले में नवरात्रि के दौरान किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं आई। यदि ऐसी स्थिति आई तो तत्काल व्यवस्था कराई जाएगी। संजीवटांक, सीएमएचओ