बिना सहमति गटर में उतारा तो सजा
यदिकिसी सफाई कर्मचारी को बिना साधन, संसाधन और खुद की सहमति के सीवरेज नाले की सफाई के लिए लगाया तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ पांच साल की कैद और दस लाख रुपए तक की सजा का प्रावधान तय कर दिया है।
यह जानकारी राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की सदस्य डॉ. लता ओमप्रकाश महतो ने मंगलवार दोपहर नगरपरिषद में मीडियाकर्मियों से बातचीत में दी। लता महतो ने बताया कि सफाई कर्मियों की समस्याएं जानने के लिए आयोग के सदस्य राउंड कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में एक कानून पारित कर दिया है। इसके अनुसार किसी भी सफाईकर्मी को सफाई करने के लिए आवश्यक स्वास्थ्य रक्षक साधन-सुविधाओं के बिना जबरन गटर में उतारा गया तो अधिकारी के खिलाफ पांच साल की सजा और दस लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा एक कानून और अलग से बना दिया गया है। इसमें किसी भी कार्मिक को उसकी सहमति के बिना गंदगी उठाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। चूंकि अब आधुनिक साधन-संसाधन चुके हैं, इसलिए साफ सफाई के लिए संबंधित निकाय ऐसे साधन का उपयोग ही ज्यादा करें। डा. लता ने बताया कि केंद्र में नई सरकार बनने के बाद कानून और कड़ा किया गया है। सफाईकर्मी की शिकायत पर तीन माह तक एक्शन नहीं लेने पर अधिकारी पर कार्रवाई का प्रावधान है।
सुलभशौचालय बनाने के लिए मिलेगा फंड
राष्ट्रीयसफाई कर्मचारी आयोग सदस्य डा. लता ओमप्रकाश महतो ने बताया सफाई कर्मियों के लिए स्वच्छ उद्यमी योजना दो अक्टूबर से शुरू की गई है। इसके तहत राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त निगम सफाईकर्मी या वाल्मीकि समाज के व्यक्ति को सुलभ शौचालय बनाकर उसके संचालन के लिए चार प्रतिशत ब्याज पर राशि उपलब्ध कराएगा।
चित्तौड़गढ़ | सर्किटहाउस में मीटिंग लेते हुए सफाई कर्मचारी आयोग की सदस्य।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की सदस्य डॉ. लता ओमप्रकाश महतो ने कहा
बातचीत
अधिकारियों से मीटिंग कर लिया फीडबैक
राष्ट्रीयसफाई कर्मचारी आयोग सदस्य महतो के सुबह साढ़े नौ बजे पहुंचने की सूचना पर कई अधिकारी तय समय पर नप पहुंच गए, लेकिन वह सवा 11 बजे पहुंची। डा. लता ने बाद में सर्किट हाउस में कलेक्टर वेदप्रकाश की उपस्थिति में प्रशासन, विभिन्न विभागों नप अधिकारियों के साथ मीटिंग कर पेयजल, स्वास्थ्य, समाज कल्याण योजनाओं की जानकारी ली। एसपी