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घर छोड़ निकले हैदराबाद के दो बच्चों को ट्रेन से उतारा

7 वर्ष पहले
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कईबार पेरेंटस पढाई को लेकर बच्चों को किस तरह डांट पिलाते हैं कि वे घर छोड़कर निकल पड़ते हैं। इसका उदाहरण बुधवार को यहां पहुंचे दो बच्चों को देखकर मिला।

दक्षिण भारत के सुदूर हैदराबाद से शहर से आठ दिसंबर को घर से निकले दसवीं कक्षा के दो छात्र यशराज शेख रहमान बुधवार अल सुबह यहां पहुंचने वाली हैदराबाद-अजमेर ट्रेन में थे। इसकी सूचना पर एएसआई नारायणसिंह ने इनको यहां ट्रेन से उतार लिया। उन्हें दोपहर में बाल कल्याण समिति में ले जाया गया। जहां समिति अध्यक्ष डा. सुशीला लढा ने दोनों छात्रों को विश्वास में लेकर पूछा। दोनों ने अपने नाम हैदराबाद निवासी यशराज पुत्र मोहनसिंह शेख रहमान पुत्र शेख करीम बताया। यशराज ने बताया कि वह परिजनों की पिटाई से परेशान होकर निकला है। मम्मी-पापा पढाई काे लेकर ज्यादा परेशान करते हैं। कम नंबर आने पर मारते भी हैं। ऐसे में वह पीड़ित बच्चों के सहयोग के लिए एकत्रित 300 रुपए लेकर मित्र शेख रहमान के साथ घर से निकल गया। वह अहमदाबाद में रहने वाले काका काकी के पास रहना चाहता है। अब माता-पिता के पास नहीं जाना चाहता है।

शेख रहमान ने बताया कि उसे भी घर वाले पढाई के लिए टार्चर करते हैं। वह घंटों पढ़ता है, लेकिन जब मार पड़ती है तो पहले का पढ़ा हुआ भी भूल जाता है। वह स्कूल में जमा कराने के 2800 रुपए की फीस लेकर घर से निकल गया। वह भी अपने माता-पिता की बजाय नाना-नानी के पास जाना चाहता है।

भाग कर आए किशोर से बात करते हुए लड्‌ढा।

बिजनेसमैन बनेंगे

बालकल्याण समिति पदाधिकारियों द्वारा पढाई का महत्व बताने पर यशराज बोला कि वह छोटा मोटा काम कर गुजारा कर लेगा। रहमान बोला कि वह बिजनेसमैन बनेगा। लढा ने पूछा कि जब पढाई ही पूरी नहीं करोगे तो कैसे बनोगे तो बच्चों को गलती का अहसास हुआ और रोने लगे।

यशराज के हैदराबाद से निकल कर अजमेर जाने की भनक उसके प्रोफेसर पिता मोहनसिंह, माता रेखा सहित अहमदाबाद में रहने वाले चाचा-चाची को लग गई और इसकी सूचना पुलिस को कर दी। इस कारण ये बच्चे पुलिस की निगरानी में गए। जैसे ही ट्रेन चित्तौडगढ पहुंची, पुलिस ने उनको संरक्षण में ले लिया। दोपहर दो बजे तक तो यशराज के चाचा-चाची यहां पहुंच भी गए। समिति पदाधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद यशराज को उनके सुपुर्द कर पाबंद किया। रहमान के परिजन भी उसे लेने के लिए हैदराबाद से रवाना हो गए।

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