भाजपा से जनता का विश्वास उठ चुका है : हरीश
बाड़मेर। जिलापरिषद के उप प्रमुख पद के लिए चुनाव में बाड़मेर कांग्रेस की फूट सामने ही गई। जिला प्रमुख का पद आरक्षित होने के कारण एक ही विकल्प था, लेकिन उप प्रमुख पद के लिए चुनाव कांग्रेसियों के लिए आपस में ही लड़ने वाला साबित हो गया। इस पद के लिए कांग्रेस की प्रदेश सचिव शम्मा खान ने निर्दलीय के रूप में पर्चा दाखिल करके सबको चौंका दिया।
मामला मीडिया में उछलने के बाद प्रदेश नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा, लेकिन तब तक नामांकन वापसी का समय जा चुका था। ऐसे में प्रेस के सामने समर्थन की घोषणा के अलावा कुछ नहीं बचा। इसके चलते शम्मा खान का नामांकन होने के बावजूद उसे अपना स्वयं का वोट भी नहीं मिल पाया।
रविवार को नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही कांग्रेस पार्टी से तीन सदस्यों सोहन लाल, डॉ. मृदुरेखा और शम्मा खान ने नामांकन दाखिल किए। इनमें से डाॅ. मृदुरेखा ने नामांकन वापस उठा लिया। पार्टी ने सोहनलाल को कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर सिंबल जारी कर दिया।
शम्मा खां को सिंबल नहीं मिलने की स्थिति में निर्दलीय ही मैदान में टिकी रही। प्रदेश सचिव शम्मा खान के बागी तेवर दिखाते हुए मैदान में डटे रहने की खबरें मीडिया में आई तो प्रदेश नेतृत्व में खलबली मची।
सूत्रों की माने तो प्रदेश नेतृत्व ने शम्मा खान पर दबाव बनाया और राष्ट्रीय सचिव पूर्व सांसद हरीश चौधरी को मामले के निपटाने को कहा। हरीश चौधरी के प्रयासों के बाद शम्मा खान ने कांग्रेस प्रत्याशी सोहन लाल को समर्थन देने की घोषणा कर दी।
मतदान की प्रक्रिया के बाद हरीश चौधरी ने प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी की गलती को स्वीकारा और कहा कि उप प्रमुख चुनाव की प्रक्रिया के बारे में पार्टी के पदाधिकारियों को जानकारी नहीं होने के कारण नामांकन वापस नहीं उठा पाए।
शम्मा खान ने भी इसे स्वीकारा और कहा कि वे कांग्रेस के साथ ही हैं। उन्होंने स्वयं अपने लिए भी वोट नहीं डाला। इस चुनाव में कांग्रेस के सोहनलाल को 23, भाजपा की विजयलक्ष्मी को 14 और शम्मा खां को खुद का वोट भी नहीं मिला।
शम्मा खान मतदान करती हुई।
आधे घंटे में वोटिंग, 10 मिनट में परिणाम
उपप्रमुख चुनाव के लिए 3 बजे मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई। साढ़े तीन बजे कांग्रेस भाजपा के जिला परिषद सदस्य मतदान के लिए पहुंचे। मतदान की प्रक्रिया करीब 30 मिनट तक चली। इसके बाद 4.10 बजे सोहनलाल को 9 मतों के अंतर से विजयी घोषित कर दिया गया। जिला प्रमुख पद के लिए कांग्रेस से एक वोट की क्रॉस वोटिंग होने के बाद रविवार को कांग्रेस पदाधिकारियों की पूरी निगरानी में कांग्रेस प्रत्याशियों को लाया गया।
^पंचायत चुनाव में कांग्रेस की नहीं भाजपा की जीत हुई है। अब तक पंचायत चुनाव में कांग्रेस का वर्चस्व था, जबकि इस बार भाजपा ने पांच प्रधान बनाए है। पंचायत चुनाव में कांग्रेस से ज्यादा भाजपा को वोट मिले है। हमारे प्रत्याशियों की हार का अंतर बहुत कम रहा है। जिला परिषद के पांच प्रत्याशी 250 से कम वोट से हार गए।
हम जिला प्रमुख बनाने की स्थिति में थे। भाजपा कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों की मेहनत ने कांग्रेस के वर्चस्व को तोड़ा है। शिव में कांग्रेस के गढ़ में भाजपा ने पहली बार प्रधान बनाया है। कांग्रेस के अलावा भी भाजपा के बड़े नेताओं ने भाजपा को हराने का प्रयास किया। फिर भी हम प्रधान बनाने में कामयाब हुए। डॉ.जालमसिंह रावलोत, जिलाध्यक्ष, भाजपा।
पूर्व सांसद राष्ट्रीय सचिव हरीश चौधरी ने कहा कि बाड़मेर की जनता का भाजपा सरकार पर विश्वास उठ चुका है। इसलिए कांग्रेस पर विश्वास कर नगरीय निकाय पंचायतीराज चुनाव में जीत दिलाई। प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के विश्वास पर कायम रहते हुए विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
चौधरी ने कहा कि जिला प्रशासन की पंचायतीराज चुनाव में निष्पक्ष भूमिका नहीं रही है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। जनता की ओर से जिताए वार्ड 37 के कांग्रेस उम्मीदवार को भी लोकतंत्र की हत्या कर हरा दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कलेक्टर को हटाने की मांग करती है।
वोटर लिस्ट में मूलाराम का नाम जोड़ दिया, जबकि डॉ. मृदुरेखा का नाम नहीं जोड़ने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण था। पूर्व सांसद ने स्वीकारा कि व्यवस्थाओं की कमी की वजह से चौहटन में कांग्रेस बहुमत के बावजूद प्रधान नहीं बना सकी। जिलाध्यक्ष फतेह खां, जिला प्रमुख प्रियंका मेघवाल, विधायक मेवाराम जैन, उप जिलाप्रमुख सोहनलाल, शम्मा खां आदि मौजूद थे।
प्रेस वार्ता करते पूर्व सांसद।
बाड़मेर. उप जिला प्रमुख स्वागत करते सासद
बाड़मेर. उप जिला प्रमुख को प्रमाण पत्र देते कलेक्टर
बाड़मेर. उप जिला प्रमुख के लिए बोट डालने आते सदस्य