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उत्तम पुस्तकों के अध्ययन से व्यक्तित्व का विकास : डाॅ.गढ़वीर

7 वर्ष पहले
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प्रभावीव्यक्तित्व निर्माण के लिए विद्यार्थियों को अपने जीवन में श्रेष्ठ पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए। किताबों के अध्ययन से व्यक्ति ज्ञान, आत्मसंतुष्टि चरित्र निर्माण जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त कर सकता हैं। पुस्तकों में ईश्वर व्याप्त है। अगर कोई व्यक्ति मंदिर-मस्जिद जाने में जितना समय गुजारता है। उतना वक्त पुस्तकों के अध्ययन में लगा दें तो वह महान बन सकता है।

यह बात उक्त उद्गार मां वांकल मालाणी महाविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित “विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास“ विषयक व्याख्यानमाला के तहत जेएनवीयू जोधपुर के प्रोफेसर डाॅ. एम.आर.गढ़वीर ने व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व विकास के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को एक श्रेष्ठ अध्येता बनना चाहिए। अध्ययन को ही पूजा माना गया है। शहीद भगतसिंह को फांसी देते वक्त भी उनके हाथ में पुस्तक थी। उन्होंने कहा कि छात्र वर्तमान में संस्कृति सभ्यता के अंतर को समझ अपने उत्तम व्यक्तित्व का विकास करें। प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी एक अलग व्यक्तिगत पहचान बनानी चाहिए।

उन्होंने इतिहास शब्द की व्याख्या करते हुए साहित्य और इतिहास में अंतर भी बताया। कार्यक्रम में महाविद्यालय प्रबंधक जगदीश विश्नोई ने कहा कि व्यक्तित्व विकास के लिए छात्र अपने आंतरिक गुणों का विकसित करें। जीवन में सभ्यता, संस्कृति को गंभीरता से ले क्योंकि संस्कृति से व्यक्तित्व की नींव बनती है।

कार्यक्रम का संचालन जोगेंद्र गोदारा ने किया। व्याख्यानमाला में राजेश गोदारा, भैराराम विश्नोई, अशोक सारण बाबूलाल विर्ट सहित गणमान्य नागरिक मौजूद थे।