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पशुपालन आजीविका का सबसे बड़ा जरिया : गोदारा
पश्चिमी राजस्थान में बसने वाले लोगों की आजीविका का पशुपालन सबसे बड़ा जरिया है। अकाल और सुकाल दोनों ही स्थितियों में पशुपालन से आय प्राप्त की जा सकती है। ऐसी स्थिति में पशुओं के स्वास्थ्य का ख्याल रखना पशुपालक का दायित्व है।
पशुओं काे विभिन्न रोगों से बचाने के लिए वेक्सीनेशन अवश्य करें। यह बात श्योर संस्था द्वारा आलमसर में आयोजित पशु चिकित्सा एवं टीकाकरण शिविर में केवीके बाड़मेर के डॉ.आदित्य गोदारा ने कही। शिविर में पशुपालन विभाग के डॉ.शंकरलाल चौधरी एवं पशुधन सहायक जोगाराम कटारिया, श्योर संस्था के सुपरवाइजर हनीफ खां, उत्तमचंद परमार एवं अहदी खां ने भी अपने विचार रखे। श्योर संस्था द्वारा पीपीए प्रोजेक्ट के अंतर्गत पशु चिकित्सा एवं वेक्सीनेशन शिविर का आयोजन हुआ। केवीके के डॉ.आदित्य गोदारा ने कहा कि थोड़ी सी सावधानी रखने से पशुओं को बीमार होने से बचा सकते हैं। पशुपालन विभाग के डॉ. शंकरलाल चौधरी ने कहा कि मौसम में हो रहे बदलाव से पशु बीमार रहने लगे हैं।
श्योर संस्था के सुपरवाइजर हनीफ खां ने बताया कि पशु चिकित्सा एवं टीकाकरण शिविर में ढाई हजार पशुओं का डीवार्मिंग किया गया। तीन सौ बीमार पशुओं का इलाज किया गया। शिविर में उत्तमचंद परमार, अहदी खां, फकीराराम मेघवाल, नानकराम लिच्छाराम ने सहयोग दिया।