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आखिरी बैठक में जिला प्रमुख-सीईओ आमने-सामने

7 वर्ष पहले
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जिलापरिषद के मौजूदा बोर्ड के कार्यकाल की अंतिम बैठक में बीआरजीएफ प्लान को लेकर सीईओ जिला प्रमुख के बीच तीखी नोक झोंक से मामला आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया। प्रस्ताव निरस्त होने से गुस्साए प्रधानों ने सीईओ को घेरते हुए खूब खरी खोटी सुनाई।

कुछ जनप्रतिनिधि तो तमीज भूल गए और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने लगे। इससे माहौल ओर गरमा गया। कलेक्टर की समझाइश के बावजूद जनप्रतिनिधि शांत नहीं हुए तो बैठक समाप्ति की घोषणा की गई। करीब तीन घंटे चली बैठक में मनरेगा का प्लान 2015-16 का प्रस्ताव पारित करने के अलावा किसी मुद्दे पर चर्चा तक नहीं हुई।

जिला प्रमुख मदन कौर की अध्यक्षता में रविवार को बैठक आयोजित की गई। मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपालराम बिरड़ा ने मनरेगा प्लान 2015-16 प्रस्तुत किया। जनप्रतिनिधियों ने विचार विमर्श बाद मेज थपथपाकर प्लान का अनुमोदन किया। बीआरजीएफ प्लान के प्रस्ताव निरस्त करने के मुद्दे पर जमकर शोर शराबा हुआ। इस दौरान जिला प्रमुख मदन कौर मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपालराम बिरड़ा के आपसी मतभेद खुलकर सामने गए। ग्रामसेवकों के ट्रांसफर बीआरजीएफ योजना के तहत कार्यों की स्वीकृतियां रद्द करने पर बैठक में जमकर हंगामा किया। मनरेगा को छोड़ कोई भी विकास का प्रस्ताव पास नहीं हुआ है।

इस दौरान कलेक्टर मधु सुदन शर्मा, सीईओ गोपालराम बिरड़ा, एडीएम हरभान मीणा, डीएसपी गुड़ामालानी ओमप्रकाश उज्ज्वल सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

सांसद,विधायक नहीं आए

बैठकमें बाड़मेर एक भी विधायक नहीं पहुंचा। इससे बैठक फ्लॉप शो साबित हुई। सांसद भी नहीं आए। इतना ही नहीं डिस्कॉम एसई, एक्सईएन, पीएचईडी एसई, सीएमएचओ सहित कई विभागों के अधिकारी भी नहीं पहुंचे। बैठक में विकास के मुद्दों पर चर्चा होने की बजाय आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी लगा दी।

अधिकारीतैयारी के साथ मीटिंग में आए: कलेक्टर

कलेक्टरने अधिकारियों को नसीहत दी कि कोई भी मीटिंग में आने से पहले पूरी तैयारी कर लें। लीपापोथी से काम नहीं चलने वाला है। बैठक में अधिकारी नहीं आए उन्हें ऑफिस में आकर मिलने को कहा। इतना ही बिना बताया जिला मुख्यालय छोड़ने पर अधिकारियों की रोक लगाई गई है, जिला मुख्यालय छोड़ने के लिए परमिशन जरूरी है।

पशुशिविर खुले और तीन दिन में बंद हो गए

जनप्रतिनिधियोंने आरोप लगाए कि जिले के सरहदी गडरारोड रामसर में बरसात की एक भी बू