रबी की सीजन में किसानों पर दोहरी मार
रबीकी सीजन में यूरिया के संकट से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ बिजली का शटडाउन दूसरी तरफ यूरिया नहीं मिलने से रबी फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिले में यूरिया की डिमांड ज्यादा है, लेकिन आपूर्ति आधी अधूरी है। इस स्थिति में महंगे दामों पर यूरिया खरीदने को किसान मजबूर है। जानकारी के अनुसार यूरिया की सरकारी दर 295 रुपए है, वहीं बाजार में 350 से 400 रुपए प्रति किलो के भाव से बिक रही है। फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसानों को मजबूरन महंगे दामों पर भी खरीद करनी पड़ रही है।
डिमांड10 हजार 500 सप्लाई 22सौ मैट्रिक टन
जिलेमें रबी फसलों की उत्पादकता के लिए यूरिया, डीएपी की आवश्यकता रहती है। इस सीजन में यूरिया की पूरी सप्लाई नहीं मिल रही है। कृषि विभाग के अनुसार नवंबर में 2200 मैट्रिक टन यूरिया की आवक हुई। दिसंबर की सप्लाई अभी तक नहीं आई है। वहीं यूरिया की 10500 मैट्रिक टन डिमांड है। इस हिसाब से महज बीस फीसदी यूरिया प्राप्त हुई। शेष अस्सी फीसदी की आवक को लेकर संशय बरकरार है। अधिकारियों के अनुसार मौसम की मार के चलते करीब आधे क्षेत्र में ही बुवाई हुई है जिससे इन आवश्यक तत्वों की जरूरत भी आधी हो चुकी है।
फाइल फोटो
बिजली की नियमित सप्लाई नहीं
यूरियाके संकट के साथ बिजली की अनियमित सप्लाई से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। सरकार ने किसानों को छह घंटे प्रतिदिन बिजली का वादा किया है, लेकिन हकीकत में कई क्षेत्रों में महज चार से पांच घंटे बिजली मिल रही है। इतना ही नहीं बार बार बिजली कटौती की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति में फसलों की उत्पादकता प्रतिवर्ष की तुलना में काफी कम हो सकती है। इसके अलावा सर्दी का असर नहीं दिखने से फसलों की बढ़ोत्तरी प्रभावित हो ही है। जीएसएस के माध्यम से मिलने वाली सुविधा भी छीन ली गई है। ऐसे में किसानों की परेशानी कम नहीं हो रही है।
इनफसलों के लिए यूरिया की जरूरत
यूरियाडीएपी की फसलों की उत्पादकता के लिए महत्वपूर्ण घटक है। डीएपी की जरूरत गेहूं के लिए रहती है। वहीं यूरिया सरसों, जीरा ईसब के लिए जरुरी है। जिले के धोरीमन्ना, सिवाना, चौहटन, शिव बाड़मेर समेत कई क्षेत्रों में रबी फसलों की सर्वाधिक बुवाई होती है। इन फसलों की उत्पादकता के लिए किसानों को इनकी महत्ती जरूरत है।
डिमांड पर नहीं मिल रही है य