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जिले के सबसे बड़े सरकारी कॉलेज में 7000 िवद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए चाहिए 124 व्याख्याता, लेकिन िसर्फ 55 ही हैं, नतीजा-पढ़ाई हो रही बाधित

4 वर्ष पहले
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प्रदेशके प्रमुख सरकारी कॉलेजों में शुमार चूरू के राजकीय लोहिया कॉलेज में नए-नए संकाय शुरू होने पढ़ाई का वर्कलोड बढ़ जाने के बावजूद पढ़ाने वाले व्याख्याता बहुत कम संख्या कार्यरत है। ऐसा वर्षों से चल रहा है। यहां से रिटायर होकर जाने वाले व्याख्याता अन्य कार्मिकों के पद अमूमन खाली ही रह जाते है।

वर्तमान छात्र संख्या क्लासों की संख्या के आधार पर वर्कलोड करीब 124 व्याख्याताअों का है, जबकि आयुक्तालय ने यहां मात्र 89 पोस्ट स्वीकृत कर रखी है। अचरज की बात ये है कि स्वीकृत पोस्ट से कम मात्र 55 व्याख्याता कॉलेज में पढ़ा रहे है, जो स्वीकृत पोस्ट से 34 कम है। करीब 72 साल पुराने लोहिया कॉलेज की खासियत ये है कि यहां से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी संसद के उच्च सदन तक पहुंच गए है। इस कॉलेज में चूरू ही नहीं आसपास के गांव कस्बों से विद्यार्थी पढ़ने आते है। पिछले साल कॉलेज के रेगुलर विद्यार्थियों की संख्या करीब 6500 थी, जो इस बार 7 हजार तक पहुंुचने का अनुमान है। यूजीसी से संबद्ध ये कॉलेज बी फर्स्ट ग्रेड में माना जाता है। वर्तमान में स्नात्तक की कला, विज्ञान, गणित वाणिज्य की रेगुलर क्लासों के अलावा स्नातकोत्तर 17 क्लासें चलती है।

सहशैक्षिक गतिविधियों की जिम्मेदारी व्याख्याताअों पर

कॉलेजमें चलने वाली सहशैक्षिक गतिविधियों की जिम्मेदारी भी इन्हीं व्याख्याताओं को निभानी पड़ती है। मसलन एनएसएस, एनसीसी स्काउट सीनियर गतिविधियां संचालित होती है, इनकी जिम्मेदारी भी व्याख्याताओं को दी हुई है। काेटा ओपन यूनिवर्सिटी इग्नू के कोर्सेज की जिम्मेदारी भी इन्हीं लोहिया कॉलेज के व्याख्याताओं को दी हुई है। इसके अलावा महिला युवा मामले आदि भी व्याख्याताओं को देखने पड़ते है।

स्नात्तक प्रथम वर्ष में सीटें बढ़ोतरी

संकायवर्तमान सीटें बढ़ोतरी

कलाप्रथम वर्ष 1280 256

साइंस बॉयो 210 30

साइंस मैथ्स 210 30

कॉमर्स 480 जरूरत ही नहीं

प्राचार्य-उप्राचार्य के रिटायर होने के बाद नहीं हुई नई नियुक्ति

प्राचार्यउप प्राचार्य की पोस्ट खाली है। डॉ. मधुरिमा भारद्वाज को कार्यवाहक प्राचार्य की जिम्मेदारी दी गई है। खाली पदों के बारे में उनका कहना है कि बार-बार कॉलेज आयुक्तालय को इस बारे में अवगत कराया जा चुका है। ये सही है कि वर्कलोड के हिसाब से पोस्ट स्वीकृत नहीं है और स्वीकृत पोस्ट के हिसाब से यहां व्याख्याता नहीं है।

पीजी में सूनी रहती अंग्रेजी-फिजिक्स की क्लासें

काॅलेजमें स्नोत्तकोतर में फिजिक्स अंग्रेजी की रेगुलर क्लासें लेने वाली व्याख्याता ही नहीं है। उर्दू जैसे महत्वपूर्ण सब्जेक्ट में केवल एक व्याख्याता कार्यरत है, जबकि उर्दू की स्नात्तक स्नोतकोत्तर की क्लासें रेगुलर लग रही है। कमोबेश यही स्थिति हिंदी विषय के व्याख्याताओं की है। हिंदी सब्जेक्ट के वर्कलोड के मुताबिक करीब 15 से 16 व्याख्याता इस सब्जेक्ट के हाेने चाहिए, जबकि वर्तमान में मात्र 4 व्याख्याता ही कार्यरत है। इसी तरह कॉमर्स में बिजनेस एडमिस्ट्रेशन ईएफएम जैसे सब्जेक्ट के लिए एक-एक व्याख्याता है।

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