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हार्टअटैक पर सुरक्षा करता है थ्रंबोलाइिटक उपचार

7 वर्ष पहले
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जिलामुख्यालय पर रविवार शाम डॉक्टरों की संगोष्ठी हुई। इसमें जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल के हृदय किडनी रोग विशेषज्ञों ने इन रोगों से संबंधी जानकारी दी।

वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ दीपेश अग्रवाल ने बताया कि हार्टअटैक आने पर रोगी को तुरंत थ्रंबोलाइटिक उपचार मिलना चाहिए। यह उपचार ऐसे रोगी के लिए जीवन रक्षक होता है। इससे खून पतला हो जाता है और हृदय की रक्तवाहिनियों की रुकावट का गलना भी शुरू हो जाता है। रोगी को स्ट्रैप्टोकाइनेज दवा देकर किसी हृदय रोग अस्पताल में भेजना चाहिए।

हार्ट सर्जन एमए चिश्ती ने दो या इससे अधिक रक्तवाहिनियों में रुकावट आने या लैफ्टमैन आर्टरी के बंद होने पर बाइपास सर्जरी करने की सलाह दी। किडनी प्रत्यारोपण विशेषज्ञ टीसी सदासुखी ने कहा कि दर्द निवारक दवाओं का बिना डॉक्टर की सलाह और अधिक मात्रा में सेवन करने के कारण देश में किडनी के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। उन्हांेने कहा कि किडनी रोगियों को बीपी शुगर नियंत्रति रखने के साथ ही खाने-पीने में परहेज रखना चाहिए। संचालन अस्पताल के वीरेंद्र पारीक ने किया।

राम मंदिर में रविवार को लायंस क्लब महात्मा गांधी अस्पताल जयपुर की ओर से हुए इस शिविर का समापन हुआ। शिविर में सहयोग देने वालों को माल्यार्पण कर, शॉल प्रतिक चिन्ह प्रदान कर सम्मान किया गया। क्लब अध्यक्ष मोहनलाल शर्मा ने क्लब के सेवा कार्यों लायनवाद के बारे में जानकारी दी। क्लब सचिव सुनील टकणेत ने आभार व्यक्त किया।

चूरू. शिविरके समापन समारोह को संबोधित करते डॉक्टर।