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प्रार्थना बिना पोस्टमैन के ही ईश्वर तक पहुंचने वाला पत्र
संसारमें किसी वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिए पोस्टमैन की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन हृदय से समर्पित की गई प्रार्थना एक ऐसी अभिव्यक्ति है, जो पोस्टमैन के बिना ही तत्क्षण गन्तव्य स्थान तक पहुंच जाती है।
ये विचार कथावाचक मृदुल कृष्ण शास्त्री ने ताल मैदान में परसराम भंवरलाल कंदोई परिवार की ओर से चल रही भागवत में व्यक्त किए। कपिल देवहूति संवाद पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देवहूतिजी ने पति कर्दन के वन की ओर चले जाने पर पुत्र कपिल के पास आई। प्रार्थना करते हुए बोली कि है प्रभो हमें संसार से मुक्त होने का मार्ग प्रदान करें।
परमभक्त ध्रुव के चरित्र पर व्याख्यान देते हुए कहा कि मात्र पांच वर्ष की अवस्था में ध्रुव ने भगवान का स्मरण किया तो प्रभु अल्प समय में ही स्वयं मधुवन में आकर ध्रुव को दर्शन देकर अखंड राज्य प्रदान करते हुए उनके लिए ध्रुव लोक का निर्माण कर दिया। यजमान श्यामलाल कंदोई ने सप|िक कंदोई परिवार के अन्य जनों ने भागवत पुराण कि पूजा की। ओमप्रकाश जैसनसरिया कोलकत्ता, भगवानदास सातडे़वाला चूरू, रमेश भरतिया राजगढ़, महावीर प्रसाद उड़सरिया, शंकर एंड शंकर, शोभाकांत स्वामी, नपा उपाध्यक्ष राजेन्द्र सोनी, विमल स्वामी, सुरेश तिवाड़ी, डॉ. पूनमचंद भाटी, गिरधारीलाल जोशी, पवन झंवर, गजानंद भिवानिया, लक्ष्मीपत रातूसरिया, श्यामसुंदर स्वामी, राजेन्द्र आंचलिया ने कथावाचक का स्वागत किया।
सरदारशहर. कथामें शास्त्री का स्वागत करते हुए श्रोतागण।