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11 में से एक भी सीएचसी पर सीजेरियन डिलीवरी नहीं, प्रसूताओं के लिए खतरा
प्रसूताओं को डिलीवरी के लिए जाना पड़ता है 60 किमी दूर बूंदी अस्पताल
मातृएवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकार भले लिए बड़े स्तर पर प्रयास करने का दावा कर रही हो, लेकिन इस कड़ी में महत्वपूर्ण साबित होने वाली सिजेरियन डिलेवरी सिर्फ बूंदी के जनाना अस्पताल में ही हो रही है। दूसरे अस्पतालों में यह सुविधा नहीं होने से हाई रिस्क प्रसूताओं को जिला मुख्यालय तक लाने में खतरा रहता है। सिजेरियन डिलेवरी के लिए महिला रोग विशेषज्ञ, सर्जन निश्चेतक का होना जरूरी है, लेकिन यह तीनों पद कापरेन सीएचसी को छोड़कर अन्य कहीं पर नहीं हैं।
11 लाख से अधिक आबादी वाले बूंदी जिले में 11 सीएचसी हैं। सीएचसी तहसील स्तर, पंचायत समिति स्तर पर या बड़े कस्बों में होती है। 11 सीएचसी में से छह तो तहसील मुख्यालयों पर है, जिनकी आबादी करीब 20 हजार है। इसके बावजूद वहां यह सुविधा नहीं है। जबकि इन क्षेत्रों से हाई रिस्क प्रसूताएं आए दिन रैफर होकर जिला मुख्यालय पर रही हैं।
हालांकि कापरेन तालेड़ा सीएचसी में यह सुविधा कुछ साल पहले चिकित्सा विभाग की ओर से शुरू की गई थी, लेकिन वहां भी इन तीनों डॉक्टरों की सेवा लगातार नहीं मिलने से यह सुविधा बंद हो गई।
अभीबूंदी में ही है यह सुविधा
^सरकारकी ओर से स्वीकृत पद उनकी उपलब्धता के अनुसार सिजेरियन डिलेवरी हो पाती है। अभी मात्र बूंदी के जनाना अस्पताल में ही यह सुविधा है। पहले तालेड़ा कापरेन में यह व्यवस्था शुरू की गई थी।
डॉ.जेपी मीणा, सीएमएचओ,बूंदी
कापरेन। स्थानीय अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर।