पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • पहली कहानी : अभीकुछ समय पहले ही एचएएल (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स

पहली कहानी : अभीकुछ समय पहले ही एचएएल (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पहली कहानी : अभीकुछ समय पहले ही एचएएल (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) के एक इंजीनियर ने नौकरी छोड़ दी। उन्होंने अपना काम शुरू किया। बच्चों के लिए इलेक्ट्रिक बाइक बनाने का। इनका नाम है मोहम्मद मुजक्किर शरीफ। उम्र 33 है। अहमदाबाद के जेसीनगर में रहते हैं। इन्होंने ‘ग्रीनूबाइक’ के नाम से पांच महीने पहले ही कंपनी शुरू की है। उन्हें जब पता चला कि भारत में बच्चों के लिए जो इलेक्ट्रिक बाइक हैं वे या चीन से आती हैं या फिर किसी और देश से। वे बेहद महंगी भी हैं। ऐसे में उन्हें गुंजाइश दिखी और उन्होंने कंपनी बनाकर प्रदूषणमुक्त बाइक बनाना काम शुरू कर दिया।

मुजक्किर जो बाइक बना रहे हैं उसका ब्रांड नेम है-रॉकर। यह सात से 12 साल तक के बच्चों के लिए है। आैर इसकी कीमत 18,000 रुपए रखी गई है। जबकि इसी तरह चाइनीज बाइक 25,000 रुपए तक आती है। उसमें कोई वाॅरंटी भी नहीं दी जाती। इस किस्म की बाइक के लिए कोई लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है। क्योंकि जो बाइक अधिकतम 25 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चले और मोटर 250 वॉट का हो उससे इससे छूट है। इस बाइक की बैटरी एक बार चार्ज करने पर यह 25 किलोमीटर तक चलती है। बैटरी चार्ज होने में छह-सात घंटे लगते हैं। इसकी अधिकतम स्पीड 24 किमी प्रतिघंटा है।

दूसरीकहानी : विनोदप्रधान 22 साल के हैं। ग्रेजुएट हैं लेकिन नौकरी करने के बजाय पिता के काम में हाथ बंटाते हैं। तीन एकड़ जमीन है। इसमें सब्जियां उगाते हैं। ओडिशा में राउरकेला के पास उनका गांव है-बडगांव। यहां से रोज अपनी मिनी लोडिंग गाड़ी में सब्जियां भरकर वे राजगंगपुर ले जाते हैं। बाजार बेचने के लिए। उनके मुताबिक, किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करके जितनी तनख्वाह मिलती, उससे ज्यादा अपने इस काम से कमा लेते हैं। नौकरी करने की वे एक और वजह बताते हैं। ये कि नौकरी के लिए घर से ऑफिस और ऑफिस से घर आने-जाने में झंझट बहुत है। इसमें टाइम भी खूब खराब होता है।

राउरकेला जिले में ही नुआगांव के रहने वाले 28 साल के रोशन साहू। ये भी सब्जियां उगाते हैं। झीरपानी बिसरा के साप्ताहिक हाट में अक्सर आते हैं। इन्हें फख्र है कि शिमला मिर्च जैसी उनके खेत की कई सब्जियां महाराष्ट्र, गुजरात और बंगाल भी भेजी जा रही हैं। हालांकि यह काम बिचौलियों के जरिए ही होता है लेकिन रोशन को कमाई बढ़िया हो जाती है।...इसी तरह नुआगांव के ही विकास