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न्यायपालिका की आजादी से समझौता नहीं : चीफ जस्टिस
विधि मंत्री भी बोले- नहीं लांघी जा सकती न्यायपालिका की स्वतंत्रता
सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस आर.एम. लोढ़ा का कहना है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा है कि 21 साल तक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का जज रहने के बाद वे भरोसे के साथ यह कह सकते हैं कि न्यायपालिका के पास उसकी स्वतंत्रता छीनने की कोशिशें नाकाम करने की ताकत है।
जस्टिस लोढ़ा ने संसद द्वारा पारित न्यायिक नियुक्ति विधेयक का जिक्र नहीं किया, जिसके तहत जजों को चुनने की कॉलेजियम व्यवस्था खत्म की जानी है। शेष| पेज 4
लेकिनउनकी टिप्पणी इसी पृष्ठभूमि में थी। चीफ जस्टिस शनिवार को दिल्ली में बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया की तरफ से हुए सेमिनार ‘रूल ऑफ लॉ कन्वेंशन-2014’ में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता अदालतों पर जनता का भरोसा कायम रखने के लिए जरूरी है। अगर कार्यपालिका या किसी अन्य के द्वारा कुछ गलत किया जाता है तो जनता की मदद करने न्यायपालिका ही आगे आती है। गौरतलब है कि चीफ जस्टिस 27 सितंबर को ही सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।
पहलेभी हुआ है टकराव
इससेपहले 11 अगस्त को जब सरकार ने लोकसभा में न्यायिक नियुक्ति विधेयक पेश किया था, उस दिन भी चीफ जस्टिस ने तल्ख टिप्पणियां की थीं। जस्टिस लोढ़ा ने तब एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि अगर कॉलेजियम सिस्टम सही नहीं है तो वे भी सही नहीं हैं।
जस्टिस लोढ़ा
नई दिल्ली | विधिमंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पवित्र है और उसे लांघा नहीं जा सकता। प्रसाद से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस आर.एम. लोढ़ा की इसी संबंध में की गई टिप्पणी के बारे में पूछा गया था। प्रसाद ने कहा कि आपातकाल के वक्त उनकी पार्टी के नेता व्यक्तिगत आजादी, मीडिया की आजादी और अदालतों की आजादी के लिए लड़े थे। मोदी सरकार भी न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करती है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
> जस्टिस लोढ़ा ने कहा- विधिक समुदाय ऐसे लोगों को दूर रखे जो न्यायपालिका पर दाग लगाने के छल-कपट में लिप्त हों।
> चीफ जस्टिस ने कहा कि मैं बिल के बारे में बात नहीं करूंगा लेकिन मैं न्यायपालिका की स्वतंत्रता के बारे में जरूर कहना चाहूंगा। यह विषय मेरे लिए प्रिय है। इस मुद्दे से समझौता नहीं हो स