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सेंदड़ा- लालपुरा के आबादी क्षेत्र में घुसा पैंथर

5 वर्ष पहले
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अमरपुरा पंचायत के लालपुरा ग्राम की आबादी क्षेत्र में शुक्रवार रात को पैंथर घुस गया। जोधपुर वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन कर छह घंटे की मशक्कत के बाद बकरियों के बाड़े से पैंथर को पकड़कर वन विभाग लेकर आए। यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद जोधपुर लेकर गए। जहां उसका इलाज होगा। पैंथर के हमले में दो बकरियों को मौत हो गई है।



एक अन्य घायल हो गई। क्षेत्रीय वन अधिकारी ओमप्रकाश व्यास के अनुसार अमरपुरा ग्राम पंचायत के लालपुरा ग्राम निवासी अकबर काठात पुत्र अहमद के मकान के सामने बाड़े में बकरियां बंधी थी, जिसमें शुक्रवार देर रात को पैंथर घुस गया। बकरियों के चिल्लाने की आवाज सुनकर अकबर ने मौके पर टार्च लेकर बाड़े में देखा तो आगे पैंथर बकरी को जख्मी कर बैठा था। वह चिल्लाया जिस पर उसका पुत्र इकबाल उसका भाई सलीम काठात भी मौके पर पहुंचे संघर्ष कर बकरी को छुड़ाया, जिसमें तीनों घायल भी हो गए। बाद में बाड़े के बाहर आकर सभी को सूचना दी। सूचना पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो गई। ग्रामीणों ने बाड़े के दरवाजे के बाहर आग लगा दी। जनहानि से बचने के लिए खेतों से लोहे की जाली लाकर बाड़े के चारों तरफ डाल दी। वन विभाग को सूचना दे दी। वनरक्षक मोहनसिंह,बलदेवसिंह,पदमसिंह भाटी मय वन विभाग की टीम रात डेढ़ बजे मौके पर पहुंची। क्षेत्रीय वन अधिकारी व्यास की सूचना पर रेस्क्यू टीम प्रभारी डॉ श्रवणसिंह,सहायक वनपाल मनोहरसिंह,बंशीलाल,महेंद्र गहलोत की टीम जोधपुर से शनिवार सवेरे सवा छह बजे मौके पर पहुंची। जोधपुर टीम के डॉ श्रवणसिंह ने ट्रेंक्यूलाइजर गन से फायर कर पैंथर को बेहोश किया गया। पैंथर काे वन विभाग की टीम नर्सरी में लाकर आई तथा प्राथमिक उपचार किया गया। बाद में उसे जोधपुर लेकर गए। जहां पूर्णतया: स्वास्थ्य होने के बाद पुन: इसी वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।

पैंथर था जख्मी

वन विभाग की टीम के डॉ श्रवणसिंह ने बताया कि लालपुरा से पकड़े गए नर पैंथर के सिर में गंभीर चोटें हैं। जिसका इलाज किया जा रहा है। पैंथर की उम्र करीब 12 -13 साल है। संभवतया पैंथर आपसी संघर्ष में ही चोटिल हुआ है, जो आसान शिकार की तलाश में आबादी क्षेत्र में घुसकर बाड़े में मवेशियों को शिकार बनाने की फिराक में था।

पिता-पुत्र गांव वालों ने दिखाई हिम्मत

लालपुरा में चारों ओर आबादी क्षेत्र तथा कुछ ही दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग तो कुछ ही दूरी पर राष्ट्रीय रेलमार्ग है। पैंथर ने रेलमार्ग पार कर आबादी क्षेत्र में शिकार करने के लिए प्रवेश किया। पहले अकबर काठात उसके पुत्र इकबाल ने संघर्ष किया तो बाद में अमरपुरा सरपंच शकरूदीन काठात ,पिंटू काठात ,आसान काठात ,विक्रम काठात ,बाबूसिंह,सलीम,अब्दुल काठात ,आलम काठात की टीम ने योजना बनाकर खेतों से जाली लाकर बाड़े के उपर ढक दिया। तब जाकर पैंथर काबू में आया। अगर ग्रामीण हिम्मत जुटाकर पकड़ने की कार्रवाई नहीं करते तो गुस्साया पैंथर हमला कर नुकसान पहुंचा सकता था।

पानी भोजन के लिए गांवों का रूख

अरावली पहाडिय़ों के गिर्द बसा मगरा क्षेत्र वन विभाग के रावली टॉडगढ़ अभ्यारण से जुड़ा है। पैंथर सहित कई जंगली जानवर पानी भोजन की तलाश में गांवों की ओर रूख करने लगे हैं।

रेस्क्यू टीम ने पकड़ लिया है

आबादी क्षेत्र में स्थित बाड़े में से पैंथर को रेस्क्यू टीम ने पकड़ लिया है। सिर में चोट होने के कारण इलाज के लिए जोधपुर लेकर गए। स्वास्थ्य होने के बाद पुन: इसी वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।

- ओमप्रकाश व्यास, क्षेत्रीय वन अधिकारी, सेंदड़ा

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