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भगवान राम, सीता लक्ष्मण ने की निषादराज से भेंट
रामलीलासमिति की ओर से शुक्रवार को रामलीला महोत्सव के तहत निषादराज से भेंट प्रसंग का मंचन किया गया। जिसमें अयोध्या के मंत्री सुमंत भगवान राम, सीता लक्ष्मण को साथ लेकर श्रृंगवेरपुर पहुंच जाते हैं। वहां निषाद राज से उनकी मुलाकात होती है मंत्री सुमंत श्रीराम जी से वापस अयोध्या चलने को कहते हैं और प्रार्थना करते हैं। लेकिन रामचन्द्र जी उन्हें नीति धर्म का उपदेश देकर अयोध्यापुरी वापस जाने को कह देते हैं। गंगा पार जाने के लिए भगवान केवट से आग्रह करते हैं। केवट ने कहा कि आपकी चरणों की रज मनुष्य बनाने वाली जड़ी बूटी है। इसलिए मेरी नाव कहीं स्त्री नहीं बन जाए, इसलिए पहले में चरण पखारुंगा। भगवान राम केवट के श्रद्धाभाव को समझ जाते हैं और केवट द्वारा चरण धोने के बाद ही नाव में सवार होकर गंगा पार करते हैं। भगवान राम केवट को मजदूरी के रुप में सीताजी की अंगूठी देते हैं, लेकिन केवट मना कर देता है। भगवान राम, सीता लक्ष्मण गंगा माता की पूजा अर्चना करते हैं। मार्ग में महर्षि भारद्वाज और ऋषि बाल्मीकि से भेंट करते हैं। ऋषि बाल्मीकि उन्हें चित्रकूट निवास करने का परामर्श देते है। सुमंत का किरदार विशाल पांचाल एवं निषादराज का सोम सिंह एडवोकेट ने निभाया। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष मोहनलाल मधुकर, रामबाबू शुक्ल, ब्रजेश कौशिक, कैलाशचंद गुप्ता, राधेश्याम गुप्ता, कमल किशोर शर्मा, लक्ष्मी नारायण शर्मा, वैद्य निर्मल खंडेलवाल, गोविंद प्रसाद शर्मा, राजेन्द्र प्रसाद अग्रवाल, मोहनलाल मित्तल, मोहन सिंह कुंतल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
कैकेयीने मांगा राम का वनवास
डीग.रामलीलामहोत्सव के तहत शुक्रवार रात अयोध्या में कैकेयी ने राम के लिए 14 साल का वनवास मांगा। कैकेयी ने राजा दशरथ से युद्व भूमि में मांगे गए दो वचनों की याद दिलाई और राजा दशरथ से दो वचन के रूप में भरत के लिए राजतिलक और राम को 14 वर्ष का वनवास मांगने के लिए तर्क-वितर्क देकर राजी कर लिया। रामलीला मंचन में कलाकारों ने इस लीला का अभिनय मंचन कर दर्शकों को भी भावविभोर कर दिया। इससे पहले राम, लक्ष्मण, सीता की आरती उतारी गई। इस अवसर पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रन्नो पहलवान, पंडित मुरारीलाल पाराशर, भवानी शंकर पाराशर, योगेश शर्मा, बृजेश पाराशर, छैलबिहारी, मोहन बंशी वाले, जीतू, सोहनलाल शर्मा आदि उपस्थित थे।
डीग. रामलीला में राम वनवास