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चंदा-सूरज नमन करे धरती कहे चितेरा वह शिल्पदेव है मेरा
भरतपुर. भगवानविश्वकर्मा जयंती पर बुधवार रात नवग्रह कुंडा के निकट विश्वकर्मा शिल्पकार सेवा समिति के तत्वावधान में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष रमेश पाठक थे जबकि अध्यक्षता टिंबर एसोसिएशन के अध्यक्ष ओम प्रकाश गुप्ता ने की।
सम्मेलन में कवि पूरन शर्मा ने जिसे चंदा सूरज नमन करे और धरती कहे चितेरा वह शिल्प देव है मेरा सुनाकर भगवान विश्वकर्मा का गुणगान किया। अलवर के सुरेंद्र पार्षद ने जो भी कड़वा लगता है वह गरल नहीं होता, सीधी लहरों से नैया को खलल नहीं होता सुनाकर तालियां बटोरीं। इस मौके पर कवि हरीश चंद हरि ने इसी पोल में घुसी बहनजी, घुसी किसी की अम्मा, घुसे किसी में खादी वाले कुर्ता और पजामा सुनाकर वाहवाही लूटी जबकि आगरा से आई कवयित्री शमीम कौसर ने अगर आपकी महर वानी रहेगी फूलों पर हमेशा जवानी रहेगी, छुपाकर रखूंगी मैं दिल तेरा दिल में मेरे पास तेरी निशानी रहेगी सुनाकर माहौल को रोमांचित कर दिया। बाड़ी से आए कवि रामबाबू सिकरवार ने हमरे बाबा बड़े दगाबाज रे, इनकी कुटिया में छिपे कई राज रे तथा बाबूलाल डीगिया ने कम्बख्त तेरी उम्र 60 साल की हो गई रचना सुनाकर श्रोताओं को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया। सम्मेलन में कवि हरिओम हरि ने अपनी रचना- सोई हुई वर्षों से लेती हुई अंगड़ाई जागी थी जवानी भारतीय लोकतंत्र की।
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चंदा-सूरजनमन...
बेच-बेचचाय कभी जिसने भरा था पेट प्रधानमंत्री बना वो महर वानी लोकतंत्र की - जबकि कोटा से आए कवि राजेंद्र पवार ने मां सख्त होकर भी क्रूर होती, मेरी ये मिट्टी कभी धूर होती सुनाई तो सन्नाटा सा पसर गया। इस मौके पर बूंदी से आए गोरख प्रचंड ने अपनी रचना- हो जिंदगी में तेरा किरदार जवानी, गर हुआ इश्क मुल्क से बेकार है जवानी सुनाकर युवा श्रोताओं में जोश भर दिया। कवि सम्मेलन में कवि लक्ष्मण चौधरी, सोमदत्त व्यास, रामबाबू विद्रोही, अशोक धाकरे सहित अन्य दूरदराज से आए कवियों ने भी रचना सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया। सम्मेलन में श्रोता भोर तक जमे रहे।