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पन्नाधाय, रैदास कालीबाई के मेवाड़ में बनेंगे स्मारक
जिनके स्मारक बनेंगे, उनके जीवन पर एक नजर
पाली के आऊवा में बनेगा स्वतंत्रता स्मारक
प्रदेश में 47 प्रोजेक्ट पर काम होगा
मेवाड़में पन्नाधाय, संत रैदास और कालीबाई के स्मारक बनेंगे। मुख्यमंत्री राजस्थान धरोहर सौंदर्यकरण एवं पुनरुद्धार योजना के तहत राजस्थान धरोहर संरक्षण प्रोन्नत प्राधिकरण प्रदेश में सांस्कृतिक धरोहरों पुरा महत्वों को बढ़ावा दे रहा है। कई पुराने प्रोजेक्ट को संवारा भी जा रहा है। इसी के तहत उदयपुर संभाग में देवगढ़ तहसील राजसमंद में पन्नाधाय, चित्तौड़ में संत रैदास और डूंगरपुर में कालीबाई के स्मारक बनाए जाएंगे। पांच-पांच बीघा जमीन पर यह स्मारक बनेंगे। प्राधिकरण के अध्यक्ष ओकार सिंह लखावत का कहना है कि स्मारक के लिए जमीनें तय होने के बाद डीपीआर निकाल कर काम शुरू करवाया जाएगा। चित्तौड़ में तो जमीन लगभग तय हो चुकी है।
डूंगरपुर जिले के रास्ता पाल गांव की भील कन्या ने 13 साल की आयु में अपने गुरु को बचाने के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए। 19 जून 1947 को पाठशाला बंद करने के विरोध के मामले में सेंगा भाई को ट्रक के पीछे उन्हें घसीटते हुए देख गुरु को बचाने दौड़ीं, लेकिन उसे गोली लग गई।
संत कुलभूषण कवि रैदास उन महान सन्तों में अग्रणी थे जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जन्म वाराणसी में1388 में हुआ था।
सन 1535 में चित्तौड़ के असली उत्तराधिकारी, विक्रमादित्य के अनुज उदय सिंह, मात्र 6 वर्ष के थे। एक दासी पुत्र बनबीर ने रीजेंट के अधिकार हथिया लिए थे। वो चित्तौड़ की राजगद्दी हासिल करना चाहता था। उसने विक्रमादित्य की हत्या कर उदय को मारने की कोशिश की, लेकिन पन्ना ने अपने पुत्र को न्यौछावर कर स्वामी भक्ति का परिचय दिया।
प्राधिकरण पाली के आऊवा में स्वतंत्रता स्मारक भी बनाएगा। इसमें आजादी में योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं जीवनी प्रदर्शित होगी। राजस्थान में आजादी का सूत्रपात आऊवा से ही हुआ था। प्राधिकरण ने यहां एक हैक्टेयर जमीन के लिए प्रशासन को कहा है।
योजना के तहत प्रदेश में महापुरुषों के स्मारक बनाने के साथ ही पुराने अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने सहित 47 प्रोजेक्ट पर काम होगा। इसके पीछे सरकार की सोच यह है कि सांस्कृतिक, धरोहर विरासत का संरक्षण पुनर्जीवन हो सके।