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24 साल का किसान बना जिला प्रमुख, देवगढ़ प्रधान पर गुटबाजी

6 वर्ष पहले
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श्याम रह गए सालवी का हो गया \\\"प्रवेश\\\'

गरीबों की समस्या को प्राथमिकता से निबटाऊंगा

भीमक्षेत्र के अजीतगढ़ में रहने वाले किसान के बेटे प्रवेशकुमार सालवी राजसमंद से अब तक की सबसे कम उम्र के जिला प्रमुख बन गए। जिला परिषद की सभी 25 सीटें जीतकर आई भाजपा में पूर्व विधायक बंशीलाल गहलोत को हराने वाले पूर्व सरपंच श्यामलाल सांवरिया भी प्रमुख के दावेदार बताए जा रहे थे, लेकिन नामांकन के वक्त ही कांग्रेस द्वारा उनकी मार्कशीट को लेकर आपत्ति जता देने से आगे किसी पचड़े की आशंका को भांपकर भाजपा ने प्रवेशकुमार के नाम पर मुहर लगा दी। हालांकि जिले के तीनों विधायकों सहित सांसद भी शुरू से ही उन्हें जिला प्रमुख बनाने के पक्ष में थे, अकेली पीएचईडी मंत्री किरण माहेश्वरी तथा जिलाध्यक्ष के सांवरिया के पक्ष में होने की चर्चा चल रही थी। इधर, जिले की सभी सातों पंचायत समितियों में भी भाजपा ने अपनी पार्टी के प्रधान बनवा लिए। देवगढ़ पंचायत समिति में प्रधान को लेकर गुटबाजी के कारण एक नाम पर सर्वसम्मति नहीं बन पाई। ऐसे में भाजपा से ही दो दावेदारों ने नामांकन कर दिए। दोनों दावेदारों के नामांकन भरने से मुकाबला रोचक हो गया।

प्रवेश कुमार जिला परिषद के तेरहवें जिला प्रमुख बने हैं। उनका निर्विरोध निर्वाचन हुआ। सभी प्रत्याशी भाजपा के ही होने से इनके सामने किसी भी प्रत्याशी ने नामांकन नहीं भरा। उनको जिला प्रमुख की जिला निर्वाचन अधिकारी कैलाशचंद वर्मा ने शपथ दिलाते ही जिला परिषद सभागार जयकारों से गूंज उठा।

दोपहर सवा एक बजे उन्हें शपथ दिलाई। भाजपा में ही जिला प्रमुख के दावेदार श्यामलाल सांवरिया उनके प्रस्तावक बने। इससे पूर्व सुबह पौने ग्यारह बजे जिला प्रमुख के लिए प्रवेश कुमार ने जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष नामांकन दाखिल किया। इस दौरान पीएचईडी मंत्री और राजसमंद विधायक किरण माहेश्वरी, सांसद हरिओम सिंह राठौड़, भाजपा जिलाध्यक्ष भंवरलाल शर्मा, भाजयुमो अध्यक्ष महेंद्र सिंह चौहान, पूर्व विधायक बंशीलाल खटीक, जिला परिषद सदस्य पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल सिंघवी, उप सभापति अर्जुन मेवाड़ा, पूर्व जिला परिषद सदस्य गनी मोहम्मद, पूर्व जिला प्रमुख भानू पालीवाल उपस्थित थे। जिला परिषद सभागार में शपथ दिलाई।

प्रवेश कुमार पुत्र उम्र: 24 साल, शिक्षा:एमए प्रिवियस, निवासी : भीम क्षेत्र के अजीतगढ़, राजनीतिक परिचय: कॉलेज में एबीवीपी के कार्यकर्ता रहे, व्यवसाय: किसान

>फरवरी 1995 से फरवरी 2000 तक हरिओम सिंह राठौड़। तब इनकी उम्र 36 साल, शिक्षा बीकॉम।> 2000 से 2005 तक बसंता रावत। तब उम्र 52 साल, शिक्षा एलएलबी। >2005 से 2008 तक नरेंद्र सिंह सोलंकी। तब इनकी उम्र 49 साल। जिला प्रमुख रहते हादसे में इनकी मौत हो गई थी। >कार्यवाहक उपजिला प्रमुख नंदलाल सिंघवी बने। उम्र 53 साल थी। >नारायण सिंह भाटी मार्च 2009 से फरवरी 2010 तक। शिक्षा बीए तब उम्र 45 साल थी।>फरवरी 2010 से फरवरी 2015 तक किशनलाल गमेती।

तब इनकी उम्र 60 साल। शिक्षा साक्षर थे।

श्यामलाल इस कारण नहीं बन पाए दावेदार

जिलाप्रमुख के लिए भाजपा की ओर से श्यामलाल सांवरिया प्रमुख दावेदार बताए जा रहे थे लेकिन एक दिन पूर्व ही समीकरण बदल गए और प्रवेश कुमार के नाम तय कर लिया गया। जानकार बताते हैं कि सांवरिया पीएचईडी मंत्री किरण माहेश्वरी के करीबी हैं। लेकिन दूसरे खेमे में सांसद हरिओम सिंह राठौड़ सहित जिले के तीन विधायक प्रवेशकुमार के नाम पर मुहर लगा चुके थे। इधर, सांवरिया द्वारा नामांकन पत्र के साथ लगाई छत्तीसगढ़ की शैक्षिक अंकतालिका का कांग्रेस विरोध कर चुकी थी। चुनाव के बाद कहीं और विरोध की स्थिति नहीं बने, इसे देखते हुए भी प्रवेश का नाम फाइनल कर दिया गया।

भीम क्षेत्र को मिला प्रतिनिधित्व

जिलाप्रमुख में भीम क्षेत्र को पहली बार प्रतिनिधित्व मिला है। इससे पूर्व भाजपा के उप प्रमुख शंकरलाल जैन भीम क्षेत्र से चुने गए थे। वे राजसमंद जिला बनने के बाद पहले प्रमुख बने हरिओम सिंह राठौड़ के कार्यकाल में उप प्रमुख थे। हालांकि कांग्रेस की ओर से कांग्रेस की ओर से पूर्व राज्य के पूर्व गृहराज्य मंत्री लक्ष्मण सिंह रावत की प|ी बसंता रावत भी भीम क्षेत्र की जिला प्रमुख रह चुकी है।

राजसमंद। जिलापरिषद के चुनाव में 25 ही वार्डों में भाजपा के ही प्रत्याशी जीत कर आए हैं। इसके बाद भी भाजपा में जिला प्रमुख को लेकर काफी गमासान मची हुई थी। सीट को लेकर भाजपा दो गुटो में बंटी हुई दिख रही थी। एक गुट वार्ड 16 के प्रत्याशी श्याम लाल सांवरिया को जिला प्रमुख बनाने पर अड़ा हुआ था। जबकि दूसरा गुट प्रवेश कुमार को जिला प्रमुख देख रहा था। शुक्रवार को देर शाम को प्रवेश कुमार का नाम फाइनल कर दिया। शनिवार को जिला परिषद में नामांकन भरने से पूर्व पीएचईडी मंत्री किरण माहेश्वरी ने श्याम लाल सांवरिया को प्रवेश कुमार सालवी का प्रस्तावक बना दिया। श्याम लाल के टूटते मनोबल को बढ़ाने के लिए मंत्री किरण ने दोनों के हाथ पकड़कर खुशी जाहिर की।