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पारंपरिक खेती छोड़ी, फूलगोभी ने बदली किसानों की आर्थिक स्थिति
लसानी | देवगढ़भीम क्षेत्र में फूलगोभी की फसल ने किसानों की आर्थिक दशा-दिशा बदल दी है। पिछले तीन-चार साल में इस क्षेत्र के कई किसानों ने गोभी की खेती करना शुरू किया था, अब यहां की फूलगोभी की खपत पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़, गुड़गांव सहित अन्य शहरों के नामी मॉल में भी हो रही है।
देवगढ़ क्षेत्र के लसानी, ताल, कांकरोद, ईसरमंड, मदारिया, कालेसरिया, आंजना, दौलपुरा, कुंदवा, पारडी, सांगावास, मियाला भीम पंचायत समिति क्षेत्र की ठीकरवास, बरार ग्राम पंचायतों के गांवों के कई किसान फूलगोभी की खेती कर रहे हैं। फूलगोभी की खपत उत्तर भारत के शहरों में हो रही है। किसान बताते हैं कि हर साल इन शहरों से व्यापारी क्षेत्र में फूलगोभी की खरीद करने आते हैं। खरीदार बढ़ने के बाद इसकी बुवाई करने वाले किसानों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। कृषि पर्यवेक्षक राजेश कुमार माहेश्वरी ने बताया कि देवगढ़ क्षेत्र में इस साल 250 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलगोभी की बुवाई की गई।
जलवायुभी अनुकूल
क्षेत्रकी जलवायु तथा मिट्टी फूलगोभी की फसल के लिए अनुकूल बताई जाती है। जलवायु अनुकूल मिलने से यहां की फूलगोभी आकार में बड़ी होती है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार फूलगोभी के लिए दोमट मिट्टी की जरूरत होती है, जो इस क्षेत्र में बहुतायत से मिलती है।
बुवाईके दो महीने में तैयार हो जाती है फसल
फूलगोभीकी बुवाई के लिए मई में बीज तैयार किए जाते हैं। जून के अंतिम पखवाड़े में फसल बोई जाती है। जो दो माह में फूलगोभी देने लगती है। यह फसल नकदी फसल की श्रेणी आती है। जिन किसानों के पास पिलाई के लिए पर्याप्त पानी होता है, वे साल में चार बार फसल लेते हैं। इस फसल में पानी की ज्यादा जरूरत होती है।
किसान बोले, फूलगोभी से आर्थिक दशा सुधरी
^पड़ोसी खेत पर फूलगोभी की बुवाई होती थी, फायदा होता देखकर मैंने भी फूलगोभी की बुवाई शुरू कर दी। परंपरागत फसलों की तुलना में इस फसल से लाखों रुपए का फायदा हो रहा है। चौथमललोहार, कृषकलसानी
^फौजमें ट्रेनिंग के दौरान अंगुली में चोट लग गई थी। इससे फौज से रिटार्यड कर दिया। घर आने पर खेती पर ध्यान देना शुरू किया। फूलगोभी की फसल में ज्यादा फायदा नजर आया। इसके बाद इसी फसल की खेती कर रहा हूं। खीमसिंह रावत, किसान,तालाब का वाडिया
^पहलेसब्जियां देवगढ़ भीम की मंडी में ले जाते थे, जहां से कम भाव मिलते थे। फू