पाली. पेयजल सिंचाई का मुख्य स्त्रोत सेलीनाल बांध रविवार को ओवरफ्लो हो गया। बांध के ओवरफ्लो होने की सूचना मिलने पर किसानों ने खुशी जताई। अभयारण्य में स्थित सूरजकुण्ड नदी में लगातार पानी की अच्छी आवक होने से बांध का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा था, जिससे किसानों ग्रामीणों को एक-दो दिन में बांध ओवरफ्लो होने की उम्मीद थी। रविवार की सुबह सात बजे ओवरफ्लो से पानी छलकना शुरू हो गया था। दोपहर बाद इस बांध पर चादर चलनी शुरू हो गई थी।
उल्लेखनीय है कि अभयारण्य के समीप स्थित सेलीनाल बांध की भराव क्षमता तो 21 फीट है। मगर इस बांध की फैलाव क्षमता अधिक होने से इसमें पानी की आवक अधिक होती है। इसलिए यह बांध पेयजल के साथ सिंचाई का भी मुख्य स्त्रोत है। इस बार मानसून के देर से दस्तक देने से बांध का तल दिखना शुरू हो गया था,जिससे किसानों ग्रामीणों में मायूसी छा:गई थी। मगर इस बार क्षेत्र में बरसात औसत से अधिक हुई है। अभयारण्य में बरसात कम होने के कारण बांध में पानी की आवक कम हुई। उसके बावजूद सूरजकुंड से निकलने वाली नदी लगातार पानी बहने से बांध का जलस्तर दिन-रात बढ़ता गया तथा रविवार को बांध ओवरफ्लो हो गया।
पेयजल का मुख्य स्त्रोत है बांध
सेलीनाल बांध पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में पेयजल का मुख्य स्त्रोत बना हुआ है। गर्मी और सर्दी के मौसम में जलदाय विभाग द्वारा इस बांध के नीचे स्थित कुओं से पानी की सप्लाई करता है। इतना ही नहीं गर्मी के दस्तक देते ही विभाग द्वारा घाणेराव,देसूरी,नारलाई,नाडोल,दुदापुरा गांव में पानी की सप्लाई इस बांध से की जाती है। ऐसे में इन गांवों के ग्रामीणों के लिए यह बांध पेयजल का मुख्य स्त्रोत बना हुआ है।
सिंचाई के लिए किसानों को पर्याप्त पानी मिलेगा
पिछले दो महिनों से घाणेराव देसूरी के किसानों की नजर इस बांध पर लगी हुई थी। बांध के कमांड क्षेत्र में इन दोनों कस्बों में किसानों की कृषि भूमि मौजूद है। बांध से निकलने वाली नहर के पानी से 3500 बीघा भूमि पर हर वर्ष सिंचाई होती है। इस बार भी किसानों को सिंचाई के लिए समय पर पर्याप्त पानी मिलेगा। बांध से किसानों को तीन पाण पानी मिल सकता है।
पेयजल के लिए आठ फीट पानी रहता है आरक्षित
सेलीनाल बांध की भराव क्षमता 21 फीट है, मगर बांध 20.50 फीट पर ओवरफ्लो हो जाता है। बांध से 12 फीट पानी सिंचाई के लिए दिया जाता है।