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नदी-नालों में पानी की आवक जारी, बांधों का बढ़ रहा जलस्तर

7 वर्ष पहले
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अभयारण्यसे निकलने वाले नदी-नालों में लगातार पानी की आवक होने से क्षेत्र में स्थित बांधों का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। बांधों में पानी की आवक होने से किसान भी खुश नजर रहे हैं। अगर इसी तरह से नदी-नालों में पानी चलता रहा तो क्षेत्र के काणा राजपुरा बांध जल्द ही ओवरफ्लो हो जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि अभयारण्य में बरसात कम होने से इस बार तेज गति से नदी-नालों में पानी नहीं चलने से किसान मायूस हो गए थे। मगर उसके बाद नदी-नालों में लगातार पानी चलने से बांधों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद काणा बांध में 19 फीट, राजपुरा बांध में 18 फीट एवं हरिओम सागर बांध में 17 फीट पानी की आवक हुई है। अभयारण्य से निकलने वाली घाणेराव नदी का पानी काणा बांध तथा परशुराम महादेव की पहाडिय़ों से निकलने वाली नदी का पानी राजपुरा बांध और हरिओम सागर बांध में मेवाड़ क्षेत्र से आने वाली नदी का पानी जा रहा है। नदियों के पानी से तीनों बांधों का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। अगर इसी गति से नदी-नालों में पानी की आवक होती रही तो काणा बांध राजपुरा बांध शीघ्र ओवरफ्लो हो जाएंगे। ऐसे में इन बांधों से किसानों को रबी फसलों की सिंचाई के लिए समय पर पर्याप्त पानी मिल जाएगा।

क्षेत्रकी कई नदियों में बह रहा पानी: देसूरीतहसील क्षेत्र में इन दिनों रणकपुर राजपुरा बांध से निकलने वाली घाणेराव नदी एवं उसके आसपास नाले, देसूरी नदी, सोमेसर नदी, पनोता नदी, मूली नदी सहित अन्य नालों में पानी बह रहा है। इन नदी-नालों में करीब दो माह तक ऐसे ही पानी बहता रहेगा।

देसूरी. घाणेराव नदी में बहता पानी।

कुओं के लिए वरदान साबित हो रहे नदी-नाले

क्षेत्रमें गिरते जलस्तर को देखते हुए इसे डार्क जोन घोषित कर रखा है। हर वर्ष क्षेत्र में जलस्तर काफी नीचे जा रहा है। ऐसे में नदी-नाले इन दिनों क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। नदी-नालों में लगातार पानी बहने से क्षेत्र में स्थित सभी कुओं का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में कुओं का बढ़ता जलस्तर सिंचाई के साथ पेयजल के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा।