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देसूरी में एक साथ उठी अर्थियों को देख हर आंख हो गई नम
तनारके जंगल में जब एक साथ चार लोगों की अर्थियां उठी तो हर आंख नम हो उठी। इनकी शवयात्रा में आस-पास के गांवों से भी ग्रामीण सम्मिलित हुए। इधर, गुडा भोपसिंह में भी दादी-पोते की एक साथ साथ शवयात्रा निकली। मृतकों के घरों पर दिनभर सांत्वना देने ग्रामीण पहुंचते रहे। गौरतलब है कि देसूरी सहित आस-पास गांवों से करीब 41 लोगों का एक जत्था ट्रैक्टर के माध्यम से आमेट जिला राजसमंद के पास स्थित ढेलन गांव भैरू बाबा दर्शनार्थ गया था। शनिवार की शाम वहां से लौटते समय देसूरी चारभुजा सड़क मार्ग पर स्थित पंजाब मोड़ से कुछ पहले ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ने से वह पलट गया। इसमें सवार सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि 34 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
वाहनोंकी आवाजों के साथ बढ़ता गया विलाप
रविवारकी सुबह तनार के जंगल में पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था। जैसे ही शव को लेकर वहां पहुंच रहे वाहनों के आने की आवाज महिलाओं की कानों में पड़ी उनका विलाप और बढ़ता चला गया। जैसे ही मृतकों के घर से शवयात्रा प्रारंभ हुई तो लोगों की आंखें भी नम हो गई। इस दौरान तहसीलदार रामसिंह राव नायब तहसीलदार ओमप्रकाश त्रिपाठी, जिला परिषद प्रमोदपालसिंह मेघवाल, सरपंच मोतीलाल चौधरी, वरिष्ठ कांग्रेसी मिश्रुखां पठान, भाजपा अध्यक्ष चुन्नीलाल सुथार, मास्टर सिंकरद खां, नेमाराम मेघवाल भी उपस्थित थे।
बच्चों का जिम्मा बूढे़ कंधों पर
देसूरी नाल में हुए हादसे में देसूरी निवासी भंवरलाल पुत्र शंकरलाल एवं तथा चंपालाल पुत्र भुराराम की भी मौत हो गई। ये दोनों शंकरलाल तथा भुराराम के इकलौते पुत्र थे। इनकी मौत के बाद भंवरलाल की दो वर्षीय पुत्री तथा चंपालाल के एक वर्षीय पुत्र सहित इनकी प|ियों का जिम्मा बूढ़े कंधों पर गया है।
दो वर्ष पहले पिता और अब मां छोड़ गई
मीराके पति बंशीलाल की दो वर्ष पूर्व बीमारी के चलते मौत हो गई थी। वह अपने बच्चे 5 वर्षीय बच्ची बदामी तथा 7 वर्षीय पुत्र महेन्द्र का मेहनत-मजदूरी कर लालन-पोषण कर रही थी। अपने बच्चों को वह पढ़ाना लिखाना भी चाहती थी। लेकिन दुर्घटना में मीरा की भी मौत हो जाने के बाद अब ये बच्चे अनाथ हो चुके है। इन बच्चों की 70 वर्षीय दादी का भी रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चों के लालन-पोषण की चिंता उसे खाए जा रही है।
शवों की सामूहिक अंत्येष्टि की गई
देसूरीनाल में हुऐ हादसों में चार मृतक भंरलाल