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निजी हाथों में जनता के पैसों की सुरक्षा

6 वर्ष पहले
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धौलपुर. शहरमें लगे एसबीआई के विभिन्न एटीएम से इन दिनों नकली, फटे जले नोट खूब निकल रहे हैं। जिससे आमजन भारी परेशान है।

एसबीआई बैंक के शाखा प्रबन्धक का दावा है कि हम तो सिर्फ मोदी पेट्रोल पंप पर लगे एटीएम में पैसे डालते हैं बाकी सभी एटीएम में रुपए डालने का कार्य भरतपुर से किया जाता है और उन्होंने निजी कंपनी को ये कार्य सौंप रखा है। लेकिन इस पूरे मामले में सवाल ये है कि उपभोक्ताओं द्वारा रुपए निकालते समय नकली, जले फटे नोट निकल रहे हैं जिसकी जिम्मेदारी किस की हैω शाखा प्रबन्धक केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं कि एटीएम में रुपए डालने का कार्य भरतपुर से किया जाता है इसलिए वहां जाकर संपर्क करो। सोमवार शाम को भी एक शिक्षक द्वारा निकाली गई राशि में एक-एक हजार के 7 नोट जले फटे निकले। जिसे लेकर दिनभर पीड़ित एक शाखा से दूसरी शाखा में चक्कर लगाता रहा। जिस कारण भारी असुविधा होने के साथ मानसिक पीड़ा से भी गुजरना पड़ा। उल्लेखनीय है कि शहर में एसबीआई बैंक के 14 एटीएम है। जिसमें से महज एक एटीएम की जिम्मेदारी शाखा प्रबन्धक अपनी बताते हैं।

कहां से आए जले नोट

एटीएमबैंक का होता है रुपए डालने की जिम्मेदारी बैंक प्रबंधन की है। अब बैंक प्रबंधन किससे रुपए डलवाता है और उसमें खराब नोट निकलते हैं तो ये जिम्मेदारी बैंक की है। निजी हाथों को बैंक ने रुपए डालने का कार्य सौंपा है तो ये जिम्मेदारी भी तो बैंक प्रबंधन की है कि निजी हाथ इसमें नकली, जले या फटे नोट तो नहीं डाल रहेω कई बार एटीएम से नकली, जले फटे नोट निकलने के मामले सामने चुके हैं। जिसमें बैंक द्वारा दवाब के बाद नोट तो बदल दिए जाते हैं। लेकिन इस विन्दु की जांच आज तक नहीं की गई कि आखिर बैंक का कौनसा कर्मचारी इन नोटों को एटीएम में रखता है। ताकि ऐसे कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सके खाताधारक को बेवजह मानसिक पीड़ा से ना गुजरना पड़े। धौलपुर में एटीएम से ही नकली, फटे खराब नोट नहीं निकलते बल्कि यहां की बैंकों से आरबीआई जयपुर तक नकली नोट पहुंच चुके हैं। मामला 2 माह पूर्व प्रकाश में आने पर हड़कंप मच गया था। इसकी जांच निहालगंज थाना प्रभारी महेशचंद्र कर रहे हैं