बच्चों का अपना अफलातून बैंक
अगरआपका बच्चा आपसे मिली पॉकेट मनी को चॉकलेट, सुपारी, गुटखा अन्य खाने पीने की चीजों में खर्च नहीं कर उस पैसे को जमा करे तो आपको कैसा लगेगा।
जी हां यह ऐसा धौलपुर जिले के स्कूलों में चल रहा है। बच्चों में बचत की आदत डालने के उद्देश्य से प्रदेशभर में एक मात्र धौलपुर जिले के करीब 300 स्कूलों में इस अनूठी पहल के तहत अफलातून नामक बैंक में बच्चों का खाता खोला जा रहा है। इसमें स्कूली बच्चे अपनी रोज की पॉकेट मनी को इकट्ठा कर स्कूलों में संचालित बैंक में जमा कर रहे हैं। जिसमें वह पॉकेट मनी की सप्ताह के प्रत्येक शुक्रवार पास बुक में एंट्री कराते हैं।
इस राशि में बच्चे अभिभावकों की पहल देखरेख पर ही जरूरत पड़ने पर अफलातून बैंक से राशि निकाल कर इसका सही उपयोग कर सकेंगे। जिसमें यह राशि शैक्षिक कार्य या शैक्षिक टूर के लिए ले सकते हैं। धौलपुर ब्लॉक के प्राथमिक उच्च प्राथमिक करीब 300 स्कूलों में अफलातून बैंक के माध्यम से करीब 70 हजार की राशि अब तक बच्चों की पॉकेट मनी के रूप में जमा हो चुकी है। इस बैंक को प्रय| संस्था की ओर से ऑपरेट किया जा रहा है और मेल जोल एंड सिटी फाउंडेशन मुंबई द्वारा इसे पूरे भारत वर्ष में प्रमोट किया जा रहा है। इसे बारां, करौली भरतपुर में संचालित किया जाएगा। प्रय| संस्था की ओर से वर्तमान में राजस्थान में धौलपुर, यूपी में बनारस सहित उत्तरी भारत के जिलों में इस तरह की योजना पर काम करने का जिम्मा मिला है।
ये बोले जिम्मेदार
^प्रय|संस्था के फाउंडर मलय कुमार ने बताया कि बच्चों को नए तरीकों दिशा से जोड़ने की अच्छी शुरूआत जिले में शुरु की है। इससे बच्चे बचत के गुर सीखकर पूंजी जमा करने के गुर अभी से मिलने से वह भविष्य में समझदार होंगे। इस कार्य को आगे बढ़ाने में शिक्षकों को अपना बहुमूल्य योगदान इस दिशा में अपेक्षित है। ताकि हर स्कूल में बच्चों में सेविंग की आदत डाली जा सके।
^राउप्रा स्कूल, भागीरथपुरा के प्रधानाचार्य इंदर सिंह ने बताया कि स्कूल में बच्चों की इस तरह की बैंक खुलने से बच्चों में उत्साह है। इसमें अब तक 271 बच्चों के नामांकन में करीब 150 बच्चों ने अफलातून बैंक में अपना खाता खोला है और प्रत्येक शुक्रवार को बच्चे स्टूडेंट बैंकर्स को ही 1 से लेकर 10 रुपए तक की राशि जमा करा रहे हैं। 10 रुपए से ज्यादा राशि जमा कराने पर बच्चे से कारण पूछा जाता है।
भास्कर व्यू
यहजरूरी है कि बच्चों को बचपन से ही सिखाएं कि पैसे की अहमियत क्या होती है। अपने बच्चों को यह बात बिल्कुल स्पष्ट तरीके से समझाएं कि आपकी हद क्या है। और आप कितने पैसों में क्या चीजें कर सकते हैं। अपने बच्चों को सिखाएं कि वह कैसे अपनी छोटी-छोटी बचत से अच्छी बचत कर सकते हैं। आजकल हर बैंक जूनियर बैंक अकाउंट रखने की अनुमति देता है। आप भी अपने बच्चों का अकाउंट खुलवाएं और उन्हें समझाएं कि थोड़े ही सही, उन्हें हर महीने पैसे डालने की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही उन्हें गुल्लक रखने की भी सीख दें। साथ ही अपने बच्चों को उन लोगों के बारे में बताएं।
मुंबई में जेरू नाम की महिला ने की थी शुरूआत
करीब20 साल पूर्व मुंबई में जेरु नाम की महिला ने इस तरह की बैंक संचालन की योजना स्कूलों में शुरू कराई थी, जिसे उस समय सरकार की ओर से इस योजना को लेकर सहयोग नहीं मिल पाया। बाद में धीरे धीरे इस कॉन्सेप्ट को अन्य देशों में मान्यता मिलने के बाद इस अफलातून बैंक का कॉन्सेप्ट सरकार को पंसद आया और इसे फिर भारत में बल मिला। शुरुआत में यूएसए, कनाडा, यूके आदि देशों में इस बैंक का संचालन किया गया। जहां की सरकारों ने इस कान्सेप्ट को मान्यता दी। वर्तमान में अफलातून बैंक का करीब 50 देशों में संचालन है। मिस्र में तो इस स्ट्रक्चर को वहां की सरकार ने काफी सराहा है।
इंडियन बैंकिंग एसोसिएशन ने किया करार
प्रय|संस्था के फाउंडर मलय कुमार ने बताया कि इस योजना से प्रभावित होकर इंडियन बैंकिंग एसोसिएशन ने इस योजना से करार किया है और स्वीकार किया है कि बच्चों के लिए यह पहल काफी सराहनीय है। वह सेविंग की आदत बच्चों में पड़ने के बाद बच्चों का अकाउंट बैंकों में खोलने को प्रोत्साहन देंगे। वहीं ट्रेनिंग ऑफ ट्यूटर भी नियुक्त किए जाएंगे।
धौलपुर. भागीरथ पुरा स्कूल में बैंक अध्यक्ष बालिका को अपनी पॉकेट मनी जमा कराते छात्र-छात्राएं।